आबादी - प्रदेश की जनसंख्या एक करोड़ से अधिक है। इसमें से करीब आठ प्रतिशत हैं जो फ्लैश फ्लड से प्रत्यक्ष रूप से और अधिक प्रभावित हैं। यह संख्या करीब आठ लाख बनती है।
पर्यटक - यह माना गया है कि करीब एक प्रतिशत पर्यटक किसी भी समय इसके प्रत्यक्ष खतरे की जद में रह सकते हैं। इससे पर्यटन राजस्व के एक प्रतिशत का नुकसान का अनुमान है।
जल विद्युत परियोजनाएं - सबसे अधिक नुकसान की आशंका इन परियोजनाओं को लेकर ही है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फ्लैश फ्लड का खतरा अधिक है।
सड़क और स्वास्थ्य केंद्र - करीब दो प्रतिशत सड़क और दो प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र भी प्रदेश में फ्लैश फ्लड की जद में हैं। केदारनाथ आपदा और चमोली में आई प्राकृतिक आपदा में भी यह सामने आया।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में जिस तरह के बदलाव हो रहे हैं, उससे जाहिर है कि अतिवृष्टि, जीएलओएफ आदि की घटनाओं में इजाफा होगा। यह जलवायु परिवर्तन के कारण भी हो रहा है और यही वजह है कि इस तरह के मामले अब अब मानसून तक सीमित नहीं रह गए हैं। सितंबर में अतिवृष्टि के मामले सामने आए हैं। ऐसे में ग्लेशियरों को अधिक तवज्जो देने की भी जरूरत है।
- अनूप नौटियाल, सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन के संस्थापक