फोरेंसिक टीम के सूत्रों के अनुसार शुरूआत में तो सैंपल को रखने के लिए छोटे डिब्बे भी उपलब्ध नहीं थे। जैसे-तैसे कर प्रशासन से अनुरोध कर डिब्बों का इंतजाम किया गया। इसके बाद डीप फ्रीजर की मांग की गई तो पता चला कि तो आसपास किसी भी सरकारी अस्पताल या अन्य जगह पर डीप फ्रीजर नहीं हैं। इसके बाद सीडीओ चमोली और सीएमओ से गुजारिश कर एक छोटा डीप फ्रीजर गोपेश्वर में मिला।
अंगों के टिशू सही रहते हैं तो जल्द मिलते हैं परिणाम
फोरेंसिक एक्सपर्ट के मुताबिक हड्डियों, बालों या अन्य हिस्सों के माध्यम से भी डीएनए प्रोफाइल तैयार हो जाती है। मानव अंग के टिशू (ऊतक) यदि सुरक्षित रहें तो यह परिणाम जल्द या यूं कहें कि कुछ घंटों और दिनों में ही आ जाते हैं। इन टिशू को सुरक्षित रखने के लिए ही सैंपलों को माइनस 20 डिग्री सेंटीग्रेट पर रखना आवश्यक होता है। यदि उन्हें सामान्य तापमान पर रखा जाता है तो वह जल्द ही खराब हो जाते हैं। इससे डीएनए प्रोफाइल तैयार करने में महीनों लग जाते हैं।
फिलहाल कोई दिक्कत की बात सामने नहीं आयी है। यदि, किसी तरह की परेशानी सामने आती है तो संबंधित विषय में बात की जाएगी। साथ ही सभी
संसाधनों को उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश है।
-अशोक कुमार, डीजीपी