आपदा के बाद से जोशीमठ थाने में 205 लोगों की गुमशुदगी दर्ज है, जिसमें से 71 शव बरामद हो चुके हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ तपोवन और रैणी क्षेत्र में खोज अभियान में जुटी हुई है। एनटीपीसी से मिली जानकारी के अनुसार टनल के एसएफटी प्वाइंट के मुहाने तक मलबा हटा लिया गया है।
यहां से टनल नीचे की तरफ है, लेकिन पानी का रिसाव बहुत अधिक होने से आगे बढ़ना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। यहां पर तीन पंपों से पानी बाहर निकाला जा रहा था। अब एक और पंप लगाकर पानी बाहर फेंका जा रहा है।
पानी कम करने का किया जा रहा है प्रयास
जब तक पानी का रिसाव कम नहीं होता तब तक आगे बढ़ना खतरनाक है। आगे टनल नीचे की तरफ है, जिससे यदि पानी तेज हुआ तो बचाव कर्मियों के लिए खतरा हो सकता है। फिलहाल पानी कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
एनटीपीसी ने आपदा में मारे गए तपोवन विष्णगाड़ जल विद्युत परियोजना के 25 श्रमिकों का मुआवजा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला कोर्ट में जमा कर दिया है। कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 के तहत यह मुआवजा दिया जा रहा है। ऋषिगंगा आपदा में एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना के 139 श्रमिक लापता हो गए थे।
कंपनी ने पीड़ित परिवारों को कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी की तरफ से बताया गया कि राज्य सरकार ने 25 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र कंपनी को मुहैया कराए हैं। जिसके तहत शनिवार को सभी 25 मृतकों के लिए क्षतिपूर्ति राशि तीन करोड़ 52 लाख रुपये कोर्ट में जमा कराए गए।
इस अधिनियम के तहत संविदा कर्मियों को मिलने वाली मासिक आय, कौशल आदि की गणना के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाता है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि जैसे ही सरकार की तरफ से अन्य श्रमिकों के मृत्यु प्रमाण पत्र मुहैया कराए जाएंगे, अधिनियम के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि कोर्ट में जमा की जाएगी।
यह मुआवजा पीड़ित संविदा कर्मियों के पीड़ित परिवार को मिलने वाले 20 लाख के मुआवजे से अतिरिक्त है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि आपदा से पीड़ित परियोजना के श्रमिकों के परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी। कंपनी उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।