चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे पर बना पुल ऋषिगंगा की आपदा में बह गया था, जिससे करीब 12 गांवों के साथ ही सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही बाधित हो गई थी। आवाजाही सुचारु करने के लिए बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया था। अब यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू हो गया है, जिसके बाद पुल जल्द तैयार हो जाएगा। आपदा के कुछ दिन बाद ही बीआरओ ने यहां पर बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन दोनों तरफ की सपोर्ट दीवार बनाने में समय लग गया। अब बीआरओ ने यहां पर गार्डर जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी महीने में ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा।
जुग्जू गांव के लिए ट्रॉली लगाने की मांग
ऋषिगंगा की आपदा में रैणी से जुग्जू को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। अभी तक ग्रामीणों की आवाजाही के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से झूला पुल बनने तक यहां पर वैकल्पिक तौर पर ट्रॉली लगाने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि तीन किमी पैदल चलकर गांव तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जुग्जू में ट्रॉली की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीण लाता होकर पहुंच रहे हैं। यह मार्ग काफी खतरनाक है। लोग जोखिम लेकर आना-जाना कर रहे हैं। यदि गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे अस्पताल ले जाने में बड़ी समस्या हो जाएगी।