तपोवन रैणी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के पांच घंटे बाद करीब पौने तीन बजे जब पानी कर्णप्रयाग तक पहुंचा तो उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई थी। इस दरम्यान नंदप्रयाग, देवलीबगड़, कालेश्वर, कर्णप्रयाग, लंगासू, जेकिंडी आदि कस्बों मे अफरातफरी मची रही। सुबह करीब 10 बजे जैसे ही सोशल मीडिया पर ग्लेशियर फटने के बाद पानी का जलस्तर बढ़ने की खबर फैली तो पूरे क्षेत्र के लोग घबरा गए।
Uttarakhand Glacier Burst: इस बार कुदरत ने किया कुछ रहम, 2013 की आपदा में एकदम उलट थे हालात
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने बाजारों में वाहनों से माइक के जरिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा। दिनभर लोग अपने मोबाइल फोन में आपदा से संबंधित वीडियो और फोटो देखते रहे। लोगों ने अपर बाजार, कर्ण मंदिर परिसर, शक्ति नगर पुजारीगांव, सेमी गांव सहित अपने घरों से नदी के जलस्तर पर बराबर नजर बनाए रखी।
पिंडर नदी के आसपास 300 मीटर क्षेत्र करा दिया गया खाली
कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदी का संगम है। ढलान होने की वजह से दोनों नदियां संगम पर तेज वेग के साथ मिलती हैं। पानी बढ़ने की दशा में अलकनंदा नदी का पानी कठोर चट्टान से टकराता है और पिंडर नदी को रोक देता है इससे पिंडर नदी क्षेत्र में बाढ़ के हालात पैदा हो जाते हैं। इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पिंडर नदी के किनारे करीब 300 मीटर के दायरे में सिमली रोड़ की तरफ घर खाली करवा दिए थे।
पूरा क्षेत्र अलर्ट पर
कर्णप्रयाग में पानी से कोई नुकसान नहीं हुआ। सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र को अलर्ट कर नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था। नदी के असर वाले क्षेत्रों में प्रशासन की टीम लगातार भमण करती रही। पूरे क्षेत्र को अलर्ट पर रखा गया हे। मजदूर आदि जो नदी किनारे थे उनको भी वहा से हटा दिया गया था।
- कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम कर्णप्रयाग