चमोली जिले के जोशीमठ स्थित तपोवन में जल प्रलय से सीमित क्षेत्र प्रभावित हुआ है। पर्यटन के लिए उत्तराखंड पूरी तरह से सुरक्षित है। इस आपदा को लेकर देश-दुनिया में जो संदेश गया है। उससे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग चिंतित हैं। उन्हें इस बात का अंदेशा कि आपदा के कारण बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों में भय पैदा हो सकता है। जबकि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज पर्यटकों से बिना किसी भय के उत्तराखंड आने का आह्वान कर चुके हैं।
कोविड-19 महामारी से प्रदेश में पर्यटन उद्योग को सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था। अनलॉक के बाद छूट मिलने के बाद भी पर्यटन कारोबार धीरे-धीरे पटरी पर लाने लगा था, लेकिन जोशीमठ के तपोवन में आई आपदा को लेकर देश-दुनिया में जिस तरह का संदेश जा रही है। उससे पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ रही है। जबकि आपदा से नुकसान एक सीमित क्षेत्र में हुआ है। प्रदेश के प्रसिद्ध बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के साथ ही मसूरी, नैनीताल, औली समेत अन्य पर्यटन स्थल पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
प्रदेश में इसी माह के अंत तक औली में नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप के साथ ही 17 से 19 फरवरी को ऋषिकेश में राष्ट्रीय क्याकिंग फेस्टिवल का आयोजन किया जाना है। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि इन दिनों बाहरी राज्यों के पर्यटन बर्फ देखने के लिए उत्तराखंड आते हैं। लेकिन चमोली आपदा को लेकर देश दुनिया में जो संदेश गया है। उससे पर्यटकों के मन में भय पैदा हो सकता है। जबकि उत्तराखंड पर्यटन के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।
चमोली जिले में आई आपदा से एक बड़ा खतरा टल गया है। इस आपदा का असर रैणी गांव से लेकर विष्णु प्रयाग तक ही रहा है। प्रदेश में सब कुछ सामान्य है। पर्यटक बेखौफ होकर उत्तराखंड घूमने आ सकते हैं।
- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री
चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में आई आपदा से पर्यटन पर आंशिक रूप से प्रभाव पड़ा है। पर्यटकों को उत्तराखंड आने के लिए घबराने की जरूरत है। प्रदेश पर्यटन के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। आपदा एक सीमित क्षेत्र में आई है।
- संदीप साहनी, अध्यक्ष, उत्तराखंड होटल एसोसिएशन