मलारी हाईवे पर पांच मार्च से वाहनों की आवाजाही सुचारु हो जाएगी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के इंजीनियरों की टीम बैली ब्रिज को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। यह भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला एकमात्र हाईवे है।
सात फरवरी को ऋषि गंगा की जल प्रलय से रैणी गांव में मलारी हाईवे पर स्थित 90 मीटर लंबा पुल बह गया था, जिसके बाद से चीन सीमा क्षेत्र में सैनिकों की आवाजाही ठप पड़ गई थी। नीती घाटी के 13 गांवों के ग्रामीण भी अपने गांवों में ही कैद होकर रह गए थे।
आपदा के दूसरे दिन ही बीआरओ ने यहां बैली ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया था जो अब लगभग बनकर तैयार हो गया है। बीआरओ के मुख्य चीफ इंजीनियर आशु सिंह राठौर ने बताया कि रैणी में 200 फीट लंबा बैली ब्रिज स्थापित किया जा रहा है। इसकी क्षमता 40 क्विंटल है। शुक्रवार से इस पर वाहनों की आवाजाही सुचारु हो जाएगी।
ऋषिगंगा प्रोजेक्ट के सभी दावों पर रोक लगाए बीमा कंपनी : डीएम
जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बीमा कंपनी (न्यू एंश्योरेंस) को ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट कंपनी के सभी दावों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में सहयोग न करने और कंपनी के मृतक कर्मियों के परिजनों को कोई सहायता राशि नहीं देने पर यह निर्देश दिए गए हैं।
ऋषिगंगा आपदा में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया था। प्रोजेक्ट में काम करने वाले 45 से अधिक कर्मी इसमें लापता हो गए, जिसमें कुछ लोगों के शव मिल चुके हैं, जबकि कुछ लापता हैं। अभी भी लापता लोगों को ढूंढा जा रहा है, लेकिन आपदा के बाद से ऋषिगंगा कंपनी ने न ही प्रशासन को कोई सहयोग किया और न ही स्थानीय लोगों से कोई संपर्क किया।
अपने कर्मियों के परिवार को कोई सहायता राशि देने की बात भी अभी तक नहीं की है। इससे स्थानीय लोगों में कंपनी के प्रति रोष है, जबकि प्रभावित लोगों के दावों का निराकरण कंपनी की तरफ से किया जाना बहुत जरूरी है। इसलिए डीएम ने न्यू एंश्योरेंस कंपनी को रैणी क्षेत्र में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट के सभी दावों पर रोक लगाने के निर्देश दिए ताकि स्थानीय लोगों को सहायता राशि दिलाई जा सके।