हिमालय बचाओ जन समिति का आरोप लगाया था कि ऋषिगंगा मेें मची तबाही के बाद तपोवन एवं रैणी क्षेत्र में खास राहत कार्य नहीं हो रहे हैं। लापता लोगों की तलाश बंद हो चुकी हैं। मौके पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं पुलिस की टीम नहीं दिखाई दे रही है। राहत के नाम पर सिर्फ बीआरओ के दिहाड़ी मजदूर हैं, जो ऋषि गंगा नदी से पत्थर निकालकर दीवार बनाने का काम कर रहे हैं।
समिति की टीम ने क्षेत्र का दूसरी बार दौरा किया
चमोली जिले के तपोवन एवं रैणी क्षेत्र का भ्रमण कर वापस लौटे हिमालय बचाओ जन समिति के सचिव डा. मुकेश सेमवाल ने प्रेस को जारी बयान में यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि समिति की टीम ने क्षेत्र का दूसरी बार दौरा किया है।
आने वाले दिनों में समिति जागरूकता अभियान चलाएगी
आपदा के बाद सरकारी वाहनों, एंबुलेंस व नेताओं के वाहनों के सायरन बजते रहते थे। विपक्षी दलों के नेताओं का काफिला लगा रहता था। अब सब नदारद हैं। कहा कि जागरूक नागरिकों और प्रभावित ग्रामवासियों का दबाव ऐसी विनाशकारी परियोजना को हमेशा के लिए बंद कर सकता है। इसके लिए आने वाले दिनों में समिति जागरूकता अभियान चलाएगी।