विगत सात फरवरी को ऋषिगंगा में आई आपदा की वजह से विष्णुप्रयाग और चमोली में कई घरों में दरारें आ गई हैं।
आपदा प्रभावित तपोवन क्षेत्र में अचानक मौसम खराब हो गया है। यहां बारिश शुरू हो गई है। जिससे राहत-बचाव कार्यों में परेशानी आ सकती है।
आज राहत बचाव कार्य की समीक्षा करने के लिए जोशीमठ में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आईटीबीपी, सेना और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही सभी एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
आईटीबीपी के जवानों द्वारा आपदा के कारण सड़क मार्ग के कटे हुए गावों में राशन पहुंचाया जा रहा है।
लापता लोगों को मलबे में से खोजने को हैदराबाद से आया सीएसआईआर का उपकरण भी काम नहीं आया। घंटों हेलीकॉप्टर उड़ाए गएए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
केंद्र सरकार के निर्देश पर वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक समेत दर्जनभर वैज्ञानिकों की टीम चमोली पहुंच गई है।
चमोली पुलिस के मुताबिक बुधवार को चौथे दिन तपोवन टनल में राहत बचाव कार्य जारी है। कुछ शव अलकनंदा के तेज बहाव में बह कर रुद्रप्रयाग और श्रीनगर तक पहुंचने की आशंका है।
वायुसेना के विमान चिनूक ने सफलतापूर्वक मलारी और एक एएलएच ने तपोवन में लैंडिंग की है। इनके द्वारा तपोवन और ग्लेशियर क्षेत्रों का एरियल निरीक्षण किया जाएगा।
नौसेना का आठ सदस्य गोताखोर दल शवों की तलाश के लिए श्रीनगर जल विद्युत परियोजना झील में उतर गया है। वहीं आपदा में लापता लोगों को मृत घोषित करने के लिए केंद्र गाइडलाइन जारी करेगा।
उत्तर प्रदेश के तीन मंत्री चमोली आपदा और आपदा में हताहत हुए यूपी के लोगों का जायजा लेने पहुंचे हैं। मंत्रियों ने हरिद्वार सिचाई विभाग के गेस्ट हाउस में इस सिलसिले में बात की। गन्ना मंत्री सुरेश राणा, राजस्व मंत्री विजय कश्यप और आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी हरिद्वार पहुंचे हैं।
आज आईटीबीपी, एनडीआरएफ, सेना, स्थानीय प्रशासन व अन्य एजेसिंयों के उच्चाधिकारियों की बैठक होगी। जिसमें आगे के राहत बचाव कार्य की रणनीति तय की जाएगी।
चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि नीती घाटी के गांवों में पर्याप्त मात्रा में रसद सामग्री पहुंचाई जा रही है। 200 प्रभावित परिवारों को राशन किट वितरित कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्र में रिलायंस जियो की कनेक्टिविटी भी शुरू कर दी गई है। तपोवन में मेडिकल कैंप भी लगाया गया है। तपोवन में प्रवेश द्वार के समीप प्रशासन की ओर से हेल्प डेस्क लगाया गया है, जहां से प्रभावित परिवारों के परिजन कोई भी जानकारी ले सकते हैं। मलारी हाईवे पर वैली ब्रिज स्थापित करने का काम भी शुरू कर दिया है।
आपदा क्षेत्र में बनी टनल की बनावट राहत कार्यों में बाधा बनी हुई है। हालात ये हैं कि मुहाने के रास्ते से केवल एक डोजर ही उसमें प्रवेश कर पा रहा है। इससे तीन दिनों में महज 150 मीटर दूरी तक ही मलबा हटाया जा सका है। ऐसे में अब टीमें वहां जाने के लिए दूसरे रास्ते तलाश रही है। इसके लिए टनल के इंजीनियरों की एक टीम भी बुलाई गई है।