चमोली जिले में बीते दिनों आई आपदा में मारे गए लोगों में से अब तक 70 लोगों के शव बरामद हुए हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि अभी तक 38 मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जा चुका है। जिला प्रशासन के अनुसार ऋषिगंगा की आपदा में लापता लोगों की तलाश जारी है। अभी तक 70 शव और 29 मानव अंग बरामद हुए हैं। जिसमें अभी भी 134 लोग लापता हैं। वहीं जुवाग्वाड़ में लोनिवि की तरफ से इंजन ट्राली लगाई जा रही है, जिससे लोगों का आवागमन आसान हो जाएगा। साथ ही क्षेत्र में बैली ब्रिज और लकड़ी के पैदल पुलों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। वहीं कर्णप्रयाग में पूर्व में मिले एक शव की शिनाख्त दीपक शर्मा पुत्र प्रताप शर्मा निवासी फरीदाबाद के रूप में हुई है।
मलारी पुल बहने से सेना व आईटीबीपी की आवाजाही ठप
ऋषिगंगा की आपदा में चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे का पुल बह गया था, जिसके बाद से मार्ग पर सेना और आईटीबीपी के साथ स्थानीय वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। ऋषिगंगा पर बीआरओ बैली ब्रिज बना रहा है, लेकिन उसके तैयार होने में अभी काफी समय लग सकता है।
पुल टूटने से अलग-थलग पड़े गांवों को जोड़ने के लिए ट्रॉली और सेना की तरफ से वैकल्पिक पैदल पुल बनाया गया है, लेकिन वाहनों की आवाजाही अभी नहीं हो पाई है। स्थानीय निवासी प्रेम सिंह बुटोला का कहना है कि पुल नहीं बनने से पल्ली रैणी, लाता, सुराईटोटा, तोलमा, पगरासू सहित अन्य गांवों का संपर्क टूटा हुआ है।
हालांकि सेना के वैकल्पिक पुल और ट्राली लगने से कुछ सुविधा जरूर हुई है, लेकिन स्थायी पुल बननेे के बाद ही समस्या का समाधान हो पाएगा। जिलाधिकारी स्वाती एस भदौरिया का कहना है कि यह बैली ब्रिज बहुत लंबा है। इसकी लंबाई करीब 200 फीट है। इसके बनने में समय लग रहा है।