उन्होंने यह रिश्वत दो किश्तों में देने का वादा किया और 13 जनवरी 2015 को अमरीश कुमार के दफ्तर में एक लाख रुपये लेकर पहुंचे। जबकि इससे पहले आठ जनवरी को कश्मीर सिंह सीबीआई को शिकायत कर चुके थे। जैसे ही कश्मीर सिंह ने अमरीश कुमार को रिश्वत दी सीबीआई ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले में सीबीआई ने 12 मार्च 2015 में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में 31 अगस्त 2015 को भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में आरोप तय किए गए। सीबीआई ने मुकदमे में 11 गवाह पेश किए।
जबकि अमरीश ने कुल चार गवाह अपने बचाव में प्रस्तुत किए। सोमवार को अदालत ने अधिनियम की धारा सात और 13 के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। दोषी को धारा सात के तहत सात साल की सजा और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जबकि, धारा 13 के तहत दस वर्ष की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। दोषी अधिकारी ट्रैप के बाद से निलंबित चल रहा है।