भाजपा नेता व पूर्व दायित्वधारी अजेंद्र अजय ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि के वैशिष्टय को कायम रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एनआरसी जरूरी है। उन्होंने प्रदेश के पर्वतीय भूभाग में जमीन की खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने और उसे विशेष क्षेत्र अधिसूचित करने की मांग की।
यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से उत्तराखंड का यह हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों की विशिष्ट भाषाई व सांस्कृतिक पहचान रही है। अत्यंत संवेदनशील सीमा के निकट लगातार बदल रहा सामाजिक ताना बाना खतरे का कारण बन सकता है।
इससे असम जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। यह भूभाग आदिकाल से सनातन धर्म की आस्था और हिंदू की प्रेरणा रहा। इसकी पवित्रता व उसके आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र को विशेष क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए।
त्रिवेंद्र सरकार के विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने एक बार फिर से विधायक निधि समाप्त करने की बात कही है। उनका कहना है कि जब वे पहली बार विधायक चुनकर आए थे, तो उन्होंने विधायक निधि समाप्त करने की पैरवी की थी। पांडेय ने यह बात तब कही जब उनसे पूछा गया कि मंत्रियों व विधायकों का टैक्स सरकारी खजाने से भरा जा रहा है।
इस बहाने पांडेय ने विधायक निधि खत्म करे का जिक्र छेड़कर नई बहस को जन्म दे दिया। वर्तमान में प्रत्येक विधायक को 3.75 करोड़ रुपये की विकास निधि मिलती है। कई विधायक तो वित्तीय वर्ष के दौरान इस विकास निधि का उपयोग तक नहीं कर पाते। इस धनराशि के उपयोग और दुरुपयोग को लेकर भी अकसर बहस और आरोप-प्रत्यारोप के दौर चलते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के भीतर से ही विधायक निधि को समाप्त करने की मांग उठती रही है। इनकम टैक्स के बहाने पांडेय इस मुद्दे को फिर से छेड़ दिया है।
सरकार मंत्री का टैक्स क्यों भरे, मैं तो खुद ही भरता हूं: महाराज
वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि सरकार को मंत्री का टैक्स नहीं भरना चाहिए। वे तो अपना टैक्स खुद ही भरते हैं? यह पूछे जाने पर कि मंत्रियों व विधायकों के टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से भरा जा रहा है। इस पर महाराज ने कहा कि वे इसकी जांच कराएंगे कि क्या ऐसा है।