धर्मांतरण के लिए इस तरह के प्रलोभन हैं शामिल
- कोई उपहार, पुरस्कार, आसान धन या भौतिक लाभ
- रोजगार, किसी धार्मिक संस्था के स्कूल या कॉलेज में निशुल्क शिक्षा
- विवाह करने का वचन
- बेहतर जीवनशैली, दैवीय अप्रसन्नता
- किसी धर्म की प्रथाओं, अनुष्ठानों और समारोहों या उसके किसी अभिन्न अंग को किसी अन्य धर्म के संबंध में हानिकारक तरीके से चित्रित करना
- एक धर्म को दूसरे धर्म के विरुद्ध महिमामंडित करना।
छद्म पहचान भी कानून के दायरे में
जानबूझकर और धोखे की मंशा से किसी अन्य व्यक्ति की धार्मिक वेभूषा यानी छद्म पहचान को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है। किसी धार्मिक या सामाजिक संगठन का झूठा रूप धारण करना भी इसमें शामिल है। इसका उद्देश्य अगर जनता को भ्रतिम करना, धोखाधड़ी करना या धार्मिक भावनाओं को आहत करना है तो उसके खिलाफ भी इस कानून में कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सार्वजनिक भावनाओं को आहत करने से समाज में अशांति फैलाना भी कानून के दायरे में आएगा।
नाबालिग और एससी एसटी का धर्म परिवर्तन में 14 साल तक की सजा
किसी नाबालिग, महिला और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर अब कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। यह दिव्यांग या मानसिक रूप से दुर्बल लोगों का धर्म परिवर्तन कराने पर भी लागू होगा। जुर्माने की राशि को भी 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने पर कम से कम सात और अधिकतम सजा 14 वर्ष की होगी। जुर्माना इसमें भी एक लाख रुपये होगा।
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सजा और जुर्माने का प्रावधान
- सामान्य मामला- तीन साल से 10 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना
- महिला, बच्चा, एससी/एसटी या दिव्यांग के मामले में-पांच से 14 साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माना।
- सामूहिक धर्मांतरण-सात से 14 साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माना।
- विदेशी धन लेने पर-सात से 14 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना
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संपत्ति की कुर्की और जांच
धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी अपराध से कोई संपत्ति अर्जित की गई हो, तो जिला मजिस्ट्रेट उसे जब्त कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति दावा करता है कि वह संपत्ति वैध है, तो उसे इसका सबूत देना होगा। इसके बाद ही जिलाधिकारी इस संपत्ति को निर्मुक्त कर सकते हैं।
पीड़ितों को संरक्षण और सहायता
पीड़ितों को कानूनी सहायता, रहने की जगह, भरण-पोषण, चिकित्सा और आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी। उनके नाम और पहचान को गुप्त रखा जाएगा। सरकार इसके लिए एक विशेष योजना भी बनाएगी ताकि पीड़ितों को तत्काल मदद मिल सके।
सरकार की जिम्मेदारी
- सरकार पीड़ितों के पुनर्वास और न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
- समय-समय पर इस कानून के क्रियान्वयन का सर्वेक्षण भी किया जाएगा।