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कैबिनेट ने संविदा पर दो हजार पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती को दी मंजूरी, कर्मचारियों की पेंशन में इजाफा

Wed, 05 Jun 2019 08:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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सरकार ने स्वास्थ्य उपकेंद्र में संविदा पर दो हजार पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती करने का निर्णय लिया है। पूर्व सरकार ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड्स (आईपीएचएस) को दरकिनार कर वर्ष 2016 में उपकेंद्र में 616 फार्मासिस्टों को संविदा पर नियुक्त करने का फैसला लिया था, जिसे त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल ने निरस्त कर दिया। अब नियमों के तहत एएनएम और हेल्थ वर्कर रखे जाएंगे। 

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प्रदेश सरकार उपकेंद्रों को सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। हालांकि पूर्व सरकार ने उपकेंद्र में फार्मासिस्टों को भर्ती करने का निर्णय लिया था, लेकिन हाईकोर्ट में इसके खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल हो गई। ऐसे में विज्ञप्ति पदों पर भर्ती नहीं हो पाई। उपकेंद्रों में फार्मासिस्टों के पद चिन्हित नहीं है। जिसके चलते मंगलवार को मंत्रिमंडल ने फार्मासिस्टों के 616 पदों पर भर्ती के लिए शुरू हुई चयन प्रक्रिया निरस्त कर दिया।

इसके स्थान पर सरकार तय मानकों अनुसार प्रत्येक केंद्र में एक एक महिला और पुरुष एएनएम या हेल्थ वर्कर और एक सफाई कर्मचारी की तैनाती करेगी। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि मंत्रिमंडल ने तय मानकों के अनुसार भर्ती के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिया है। विभाग ने अवगत करवाया है कि लगभग दो हजार पद संविदा पर उपकेंद्रों में भरे जाएंगे। जल्द ही इसके लिए विज्ञप्ति जारी कर दी जाएगी।

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अंशदायी पेंशन में 14 फीसदी योगदान देगी सरकार

केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी अंशदायी पेंशन योजना में अपनी ओर से दिए जाने वाले योगदान को बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में वित्त विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। सरकार के इस फैसले से एक अक्टूबर 2005 के बाद से नियुक्त करीब 70 हजार कर्मचारियों को फायदा होगा। अंशदान बढ़ाए जाने ये सरकारी खजाने पर 150 करोड़ रुपये सालाना खर्च बढ़ेगा।   

अंशदायी पेंशन योजना में हर महीने कर्मचारी का न्यूनतम योगदान उसके मूल वेतन का 10 प्रतिशत होता है। प्रदेश सरकार भी अपनी ओर से योजना में 10 फीसदी का अंशदान देती है। वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत सरकार के योगदान की राशि को 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया था। उसी तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी इसे बढ़ाने का निर्णय लिया।

लोकसभा चुनाव की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को लंबित रखा था। मंगलवार को वित्त विभाग के इस प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने चर्चा की और अपनी सहमति दी। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि राज्य सरकार ने भी अपना मासिक अंशदान एक अप्रैल 2019 से वेतन और महंगाई भत्ते का 14 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।
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