कैबिनेट विस्तार की संभावना के पीछे कुछ प्रमुख वजह हैं। मसलन, राज्य में विधानसभा चुनाव को डेढ़ वर्ष का समय रह गया है। मुख्यमंत्री के पास 50 से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी है। अब उन्हें चुनावी माहौल बनाने के लिए पूरे प्रदेश का दौरा करना है।
मंत्रालयों और विभागों का काम सतत चलता रहे, इसलिए यह जरूरी है कि उन पर विभागों का बोझ कुछ कम हो। दूसरी वजह, क्षेत्रीय संतुलन को लेकर है। स्वर्गीय प्रकाश पंत के निधन से कैबिनेट में कुमाऊं का प्रतिनिधित्व कम हुआ है। सियासी समीकरणों के हिसाब से पार्टी भी संतुलन साधना जरूरी मान रही है।
दौड़ में कई दावेदार
त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल में किन विधायकों को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा, यह अभी बड़ा रहस्य है। लेकिन पार्टी में कई ऐसे प्रमुख विधायक हैं, जो वरिष्ठ होने के साथ पूर्व में मंत्री रहे हैं। इनमें देहरादून कैंट से उम्रदराज विधायक हरबंस कपूर जो पूर्व कैबिनेट मंत्री व विस अध्यक्ष रह चुके हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल हैं जो सीमांत जिले पिथौरागढ़ की डीडीहाट विस से हैं।
कपकोट के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, राजपुर रोड के खजानदास भी पूर्व मंत्री रह चुके हैं। इनके अलावा विकासनगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान, स्वर्गीय प्रकाश पंत की धर्मपत्नी चंद्रापंत, बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट और खटीमा से पुष्कर सिंह धामी के नाम अकसर चर्चाओं में रहे हैं। हरिद्वार के विधायक भी दौड़ में पीछे नहीं हैं।