मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में मंगलवार देर शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। वर्ग चार की भूमि को छह श्रेणियों में बांटकर समाधान की राह निकाली गई है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की मांग एक तरह से पूरी कर दी गई है।
बैठक में तीन मंत्री कृषि मंत्री हरक सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और वन मंत्री दिनेश अग्रवाल मौजूद नहीं थे।
मुख्य सचिव एन. रविशंकर, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने मीडिया को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी।
2013 की आपदा में गलत तरीके से नुकसान का मुआवजा पाने वालों से सरकार कोई वसूली नहीं करेगी। वहीं पंडा समाज को भी अब आपदा पीड़ितों की श्रेणी में लाकर नुकसान का मुआवजा देने पर मंत्रिमंडल ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि आपदा के दौरान कुछ मामले ऐसे सामने आए जिन्होंने गलत दस्तावेज, गलत स्वमूल्यांकन से अधिक मुआवजा ले लिया है। मंत्रिमंडल ने ऐसे लोगों से वसूली न करने का फैसला लिया है।
उन्होंने बताया कि इससे सरकार को करीब 30 लाख रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि केदारघाटी के 15-20 ऐसे मामले भी हैं जो आपदा में नुकसान का साक्ष्य नहीं दे पाए हैं ऐसे लोगों को भी मंत्रिमंडल ने सहानुभूति पूर्वक मुआवजा देने का फैसला लिया है।