प्रदेश सरकार को सिर्फ भूमि उपलब्ध करानी है, विस्तारीकरण पर आने वाला सारा खर्च केंद्र सरकार देगी। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाने लिए 60 मीटर चौड़ा और 270 मीटर लंबा रनवे बनाया जाएगा। इसके लिए 105 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी।
चिह्नित जमीन में सरकारी व निजी दोनों हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से दी गई एयरपोर्ट विस्तारीकरण रिपोर्ट का नागरिक उड्डयन विभाग ने अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किया है। विस्तारीकरण के बाद जौलीग्रांट एयरपोर्ट से वियतनाम, कंबोडिया, दुंबई समेत गल्फ कंट्री के लिए हवाई सेवाएं शुरू हो जाएंगी।