उत्तराखंड राज्य में भी अब यूपी की तर्ज पर डीजल सस्ता हो गया है। अब डीजल प्रति लीटर 52 पैसे सस्ता मिलेगा। वर्तमान में डीजल पर निर्धारित टैक्स दर को उत्तर प्रदेश के समान करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में डीजल की कीमत फर्क नहीं रहेगा। डीजल पर टैक्स दर को 21 प्रतिशत घटा कर 17.48 करने से भी प्रदेश में डीजल की खपत में बढ़ोतरी नहीं हुई तो सरकार को सालाना 5 से 8 करोड़ तक राजस्व नुकसान होने का अनुमान है।
उत्तराखंड में वैट अधिक होने से उत्तर प्रदेश की तुलना में पेट्रोल व डीजल महंगा है। इससे बाहर से आने वाले ट्रांसपोर्टर उत्तराखंड के बजाय उत्तर प्रदेश में ही डीजल व पेट्रोल भरवाते थे। पेट्रोल व डीजल की बिक्री घटने से राजस्व पर भी असर पड़ रहा था।
उत्तर प्रदेश के समान ही डीजल पर टैक्स दर 17.48 प्रतिशत या 9.41 रुपये प्रति लीटर जो भी अधिक हो, करने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास हो गया। प्रदेश में पेट्रोल पर निर्धारित टैक्स दर में कोई परिवर्तन नहीं होगा। प्रदेश को अप्रैल 2017 से अब तक डीजल की बिक्री से सरकार को 490 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।
राज्य कैबिनेट की अहम बैठक बुधवार को सचिवालय में संपन्न हुई। बैठक में रिकार्ड 55 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें 50 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें 35 प्रस्ताव अकेले स्थानीय निकायों के विस्तार से जुड़े थे। निकाय चुनावों के ठीक पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में पूर्वाह्न 11 बजे कैबिनेट की बैठक शुरू हुई। बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी है। स्थानीय निकायों के विस्तार से जुड़े अहम प्रस्ताव पर भी कैबिनेट की मुहर लग गई है। इसमें 35 निकायों के सीमा विस्तार को मंजूरी दी गई है, जिसमें तीन नगर निगम, 22 नगर पालिका और 10 नगर पंचायतें शामिल हैं।