प्रदेश में 18 वर्ष से ऊपर करीब 37 लाख महिलाएं हैं। ये सभी 2022 के विधानसभा चुनाव में वोट करेंगी। महिलाओं में आर्थिक मजबूती के लिए पिछले चार साल के दौरान सरकार ने कई फैसले लिए हैं, लेकिन महिलाओं को उनकी पति की पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने और मुख्यमंत्री घसियारी योजना दो महत्वाकांक्षी फैसले हैं।
जानकारों का मानना है कि सरकार इन दोनों फैसलों को लागू कराने में कामयाब रही तो इससे महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बनाने में तो मिलेगी, चुनाव में उसे इसका लाभ भी मिल सकता है। इसके अलावा बजट में पहली से आठवीं तक के स्कूली बच्चों को मुफ्त बस्ता व जूते देने की घोषणा के भी सियासी मायने हैं। इस घोषणा से सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चे लाभान्वित होंगे।
चुनावी साल में सरकारी तंत्र से काम कराना आसान नहीं
चुनावी साल में सरकारी तंत्र से काम कराना आसान नहीं होगा। काफी कुछ मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों के कौशल पर निर्भर करेगा। वे बजटीय घोषणाओं को लागू कराने के लिए जितने प्रभावी तरीके से सरकारी तंत्र पर दबाव बनाएंगे, परिणाम उतनी तेजी से प्राप्त होंगे, क्योंकि विभागों को समय पर बजट उपलब्ध कराने से लेकर उसे तय समयसीमा में खर्च करने के लिए सरकारी तंत्र के पास बेशक पूरा वित्तीय वर्ष हो, लेकिन चुनाव में जाने से पूर्व सत्तारूढ़ भाजपा के पास मुश्किल से छह से आठ महीने होंगे।
सरकार ने बजट में जितनी योजनाओं का प्रावधान किया गया है, उनके लिए हमारे पास पूरी धनराशि है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिले। बजट की सभी घोषणाएं जितनी शीघ्रता के साथ पूरी हो सकती हैं, उन्हें पूरा किया जाए।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्य मंत्री