फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड बजटः चुनावी वर्ष का सरकार को फायदा भी तो नुकसान भी, पढ़ें खास रिपोर्ट

Mon, 08 Mar 2021 01:29 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
- फोटो : pixabay
विज्ञापन

ग्रीष्मकालीन राजधानी से 57400.32 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट पास कराकर देहरादून लौटी प्रदेश सरकार के लिए चुनावी वर्ष में लोकलुभावन घोषणाओं को धरातल पर उतारना सहज नहीं माना जा रहा है। चुनावी वर्ष में जनहित से जुड़ी घोषणाएं करने का उसे सियासी फायदा तो है लेकिन नुकसान वाली बात यह है कि इन सभी घोषणाओं को पूरा करने के लिए उसके पास ज्यादा से ज्यादा आठ महीने का वक्त है।

विज्ञापन


ऐसा इसलिए है क्योंकि इस वर्ष 2022 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। सियासी जानकारों के अनुसार, सरकार के पास बजट की घोषणाओं को पूरा करने के लिए केवल आठ महीने का वक्त है। इसलिए कम से कम प्रदेश के लोगों को घोषणाओं का एहसास कराने के लिए संगठन और सरकार दोनों को ही बेहद तेजी के साथ काम करना होगा।

भराड़ीसैंण में मुख्यमंत्री ने बजट पेश करने के साथ ही गैरसैंण को मंडल बनाने की घोषणा की है। कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल मंडल बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की इस घोषणा के सियासी निहितार्थ हैं। जानकार इसे पहाड़ की जनभावनाओं के प्रतीक गैरसैंण के प्रति मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता के तौर पर भी देख रहे हैं।
विज्ञापन


इसे स्थायी राजधानी की दिशा में उठाया गया एक और कदम भी माना जा रहा है। सरकार के सामने चुनौती सिर्फ यही है कि मंडल बनाने की घोषणा के बाद गैरसैंण में कमिश्नरी के अस्तित्व को कितनी तेजी के साथ जमीन पर उतार पाती है। 
 

विज्ञापन

37 लाख महिलाओं पर सरकार का फोकस 

प्रदेश में 18 वर्ष से ऊपर करीब 37 लाख महिलाएं हैं। ये सभी 2022 के विधानसभा चुनाव में वोट करेंगी। महिलाओं में आर्थिक मजबूती के लिए पिछले चार साल के दौरान सरकार ने कई फैसले लिए हैं, लेकिन महिलाओं को उनकी पति की पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने और मुख्यमंत्री घसियारी योजना दो महत्वाकांक्षी फैसले हैं।

जानकारों का मानना है कि सरकार इन दोनों फैसलों को लागू कराने में कामयाब रही तो इससे महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बनाने में तो मिलेगी, चुनाव में उसे इसका लाभ भी मिल सकता है। इसके अलावा बजट में पहली से आठवीं तक के स्कूली बच्चों को मुफ्त बस्ता व जूते देने की घोषणा के भी सियासी मायने हैं। इस घोषणा से सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चे लाभान्वित होंगे। 

चुनावी साल में सरकारी तंत्र से काम कराना आसान नहीं

चुनावी साल में सरकारी तंत्र से काम कराना आसान नहीं होगा। काफी कुछ मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों के कौशल पर निर्भर करेगा। वे बजटीय घोषणाओं को लागू कराने के लिए जितने प्रभावी तरीके से सरकारी तंत्र पर दबाव बनाएंगे, परिणाम उतनी तेजी से प्राप्त होंगे, क्योंकि विभागों को समय पर बजट उपलब्ध कराने से लेकर उसे तय समयसीमा में खर्च करने के लिए सरकारी तंत्र के पास बेशक पूरा वित्तीय वर्ष हो, लेकिन चुनाव में जाने से पूर्व सत्तारूढ़ भाजपा के पास मुश्किल से छह से आठ महीने होंगे।

सरकार ने बजट में जितनी योजनाओं का प्रावधान किया गया है, उनके लिए हमारे पास पूरी धनराशि है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिले। बजट की सभी घोषणाएं जितनी शीघ्रता के साथ पूरी हो सकती हैं, उन्हें पूरा किया जाए। 
- मदन कौशिक, संसदीय कार्य मंत्री 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें