कृषि : प्रदेश सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा पिछले दो बजट में लगातार की। इसके लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग से योजना भी तैयार की जा चुकी है। प्रदेश की जीडीपी में कृषि का योगदान अभी तक करीब 10 प्रतिशत ही है। यह तब है जबकि प्रदेश में करीब 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। पर्वतीय जिलों में 85 प्रतिशत से अधिक खेती असिंचित है। जैविक खेती से संबंधित योजनाओं का अभी प्रभाव दिखना बाकी है।
स्वास्थ्य : प्रदेश सरकार इस समय स्वास्थ्य पर जीडीपी का करीब तीन प्रतिशत खर्च कर रही है। पहले यह खर्च 0.9 प्रतिशत था। इतना होने पर अन्य राज्यों की तुलना में यह खर्च कम है। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक की जनसंख्या पर मात्र 55 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जबकि इनकी संख्या 104 होनी चाहिए थी। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र 254 हैं जबकि इनकी संख्या मानकों के हिसाब से 417 होनी चाहिए। प्रदेश में 6528 की जनसंख्या पर केवल एक सरकारी डाक्टर तैनात है।
शिक्षा : आर्थिक सर्वे के मुताबिक प्रदेश में पर्वतीय जिलों में नियमित पांच हजार से अधिक पद खाली हैं। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में केवल 55 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में खेल के मैदान हैं। 78 प्रतिशत स्कूलों में ही प्राथमिक स्वास्थ्य जांच हो रही है। माध्यमिक स्तर के 31 प्रतिशत स्कूलों में ही खेल के मैदान और 40 प्रतिशत में पुस्तकालय हैं। हिमाचल से तुलना करने पर यह कमी और अधिक नजर आती है। हिमाचल में 85 प्रतिशत स्कूलों में खेल के मैदान, 95 में पुस्तकालय मौजूद हैं।
बिजली : जल विद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा, पिरुल से बिजली आदि के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश सरकार को 52 प्रतिशत बिजली खरीदनी पड़ रही है। प्रदेश में बिजली की कुल मांग करीब 1600 मेगावाट प्रतिदिन है। सौर ऊर्जा में 4077 मेगावाट की क्षमता है। अभी तक प्रदेश में मात्र 257 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।