ऐसा नहीं है कि प्रदेश सरकार के स्तर पर इस मामले में कुछ नहीं हो रहा है। सरकार ने रोजगार वर्ष घोषित किया, लेकिन सरकारी विभागों में नौकरियां सीमित ही हैं। इंवेस्टर्स समिट में आए नए निवेश के आधार पर सरकार करीब तीन लाख नए रोजगार के अवसर सामने आने का दावा भी कर रही है। यह भी साफ है कि नए निवेश का यह रोजगार लंबे समय बाद ही सामने आ पाएगा।
वर्ष - बेरोजगारी दर - एलएफपीआर - स्वरोजगार -नियमित रोजगार - बेमियादी
2004-05 - 2.1 - 67.3 - 75 - 13.7 - 11.3
2011-12 - 3.0 - 53.8 - 69 - 17.6 - 13.4
वर्तमान में - 4.2 - 52.6 - 56.9 - 24.2 - 18.9
52.6 प्रतिशत है एलएफपीआर
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) का मतलब प्रदेश में काम करने वाले 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की कुल संख्या होता है। प्रदेश के लिए वर्तमान में यह आंकड़ा 52.6 प्रतिशत है। इसमें मौसमी रोजगार पाने वाले लोग भी शामिल हैं।
जिलों में बेरोजगारी दर (प्रतिशत में)
देहरादून-5.9, हरिद्वार- 5.1, टिहरी- 4.6, पौड़ी-4.5, ऊधमसिंह नगर- 4.2, चमोली-4.2, नैनीताल-3.9, अल्मोड़ा- 3.6, चंपावत-3.4, बागेश्वर-2.3, रुद्रप्रयाग- 1.8, पिथौरागढ़-1.7, उत्तरकाशी- 1.0
(स्रोत: उत्तराखंड मानव विकास रिपोर्ट 2019)