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इन्हें भी एग्जाम में मिली हार पर खुद से नहीं 'हारे' और पा लिया ऊंचा मुकाम

Wed, 31 May 2017 05:31 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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sachin tendulkar
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हार कर जीतने वालों की फेरहिस्त में सबसा पहला नाम मास्टर ब्लास्टर सचिन का ही आता है। अपने पहले मैच में वह 15 रन बनाकर बोल्ड हो गए थे। उस नाकामी को अगर वह दिल से लगा बैठते तो क्या वह आज क्रिकेट के भगवान बन पाते, शायद नहीं।
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बात करते हैं इन दिनों आए कई बोर्ड के परिणामों की। अगर आप दसवीं और बारहवीं में बहुत अच्छे अंक नहीं भी ला पाए हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एक परीक्षा जीवन में सफलता का कोई पैमाना नहीं है।

कई ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने हाइस्कूल और इंटर में औसत अंक प्राप्त करने के बावजूद जीवन में उच्च मुकाम हासिल किया। यहां आपका परिचय ऐसी ही कुछ शख्सियत से कराया जा रहा है...
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इंटर में थर्ड डिवीजन, अब मिला राष्ट्रपति पुरस्कार 

sd sharma
विधि के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने पर राष्ट्रपति के हाथों पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार प्राप्त करने वाले कुमाऊं विवि में विधि विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.एसडी शर्मा अब जाने माने शिक्षाविद् हैं, उन्होंने हाईस्कूल परीक्षा प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर द्वितीय श्रेणी में पास की थी, जबकि इंटरमीडिएट तृतीय श्रेणी में पास किया। 

परिवार की माली हालत ठीक न होने के चलते प्रो. शर्मा ने इंटर परीक्षा पास करने के बाद बिजली विभाग में चतुर्थ श्रेणी (कुली) पद पर काम किया। बाद में अल्मोड़ा में लाइन मैन और मीटर रीडर के तौर पर प्रमोशन हो गया। जीवन में कुछ करने की ठानी और प्राइवेट बीए (द्वितीय श्रेणी) से किया। फिर अल्मोड़ा कैंपस में चलने वाली एलएलबी की सायंकालीन कक्षा में प्रवेश ले लिया और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

नौकरी से अवकाश लेकर एलएलएम किया और विवि में द्वितीय टॉपर रहे। उसके बाद कुमाऊं विवि से लॉ में पीएचडी करने वाले पहले छात्र बने। उन्होंने नेट परीक्षा भी पास की। बाद में तेजी से मुकाम हासिल करते हुए विधि में पुस्तक लिखी और कुछ बेहतरीन लेख प्रकाशित होने के बाद कुमाऊं विवि में सीधे रीडर पद पर नियुक्त हुए। प्रोफेसर के साथ विभागाध्यक्ष और डीन पदों पर रहे। वह नेशनल लॉ विवि गांधीनगर गुजरात, नेशनल लॉ विवि पटना, बुंदेलखंड विवि झांसी में भी प्रोफेसर पद पर चयनित हुए लेकिन वहां ज्वाइन नहीं किया।

नेशनल लॉ कालेज शिलचर में विभागाध्यक्ष रहे बाद में दोबारा कुमाऊं विवि लौट आए।  प्रो. एसडी शर्मा को मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार से नवाजा है। प्रो.एसडी शर्मा विधि में अब तक कई पुस्तकें लिख चुके हैं और उनके हिंदी और अंग्रेजी भाषा में अब तक 82 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अंग्रेजी भाषा में लिखी गई उनकी राइट टू इंफॉरमेशन, टेरोरिज्म एंड ह्यूमन राइट और क्रेटिव एक्टिविटीज एंड लॉ पुस्तकें भी काफी प्रसिद्ध हैं। प्रो. शर्मा का कहना है कि दसवीं, बारहवीं में बहुत अच्छे अंक नहीं आए तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। समझ आ जाने के बाद निरंतर लगन और परिश्रम से उच्च शिखर पर पहुंचना संभव है। 
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इंटर में महज 57 प्रतिशत अंक, पर कामयाब डॉक्टर बने वीके जोशी

vk joshi
टनकपुर निवासी डा.वीके जोशी इन दिनों बागेश्वर जिला अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात हैं। उनकी पत्नी डा.प्रभा जोशी भी नामी सर्जन हैं, लेकिन डा.वीके जोशी पढ़ाई के दिनों में असाधारण नहीं थे।

यहां तक कि इंटरमीडिएट में उन्हें महज 57 प्रतिशत अंक ही मिल सके, लेकिन उन्होंने सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने लखनऊ के केजी मेडिकल कॉलेज से ऑर्थोपैडिक सर्जरी का डिप्लोमा किया।

डा.जोशी बताते है कि कई बार अपेक्षित कामयाबी न मिल पाना हालात पर निर्भर होता है। जब उन्हें इंटर में अपेक्षित अंक नहीं मिले तो उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया। हर हाल में डॉक्टर बनना। इसके लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की।

मेहनत ने उन्हें कामयाबी दिलाई और मेडिकल कॉलेज में चयन हुआ। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। डा.जोशी कहते हैं कि कम अंक आना आत्ममंथन का मौका देता है। नसीहत देते हैं कि कम नंबर लाने वाले छात्र-छात्राओं को निराश होने के बजाय कमियों को समझ उसे दूर करना चाहिए।
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