डॉ. शाहिद बताते है कि कई बार अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाना हालात पर निर्भर होता है। जब उन्हें इंटर में भी कम नंबर मिले, तो उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया।
हर हाल में डॉक्टर बन लोगों की सेवा करना। इसके लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की। परिश्रम ने उन्हें कामयाबी का स्वाद दिलाया। आयुर्वेदिक कॉलेज में चयन हुआ। और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
डॉ. शाहिद कहते हैं कि कम अंक आना आत्ममंथन का अवसर देता हैं। नसीहत देते हैं कि कम नंबर लाने वाले छात्र-छात्राओं को कतई मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि कमियों को समझ उसे दूर करने पर अपेक्षित नतीजे जरूर मिलेंगे।