वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग का काम रोके जाने के मामले में कहा कि कहा कि पूरी लड़ाई लड़ने के बाद अब टाइगर रिजर्व एरिया बताकर मार्ग को रोका जा रहा है।
डॉ. रावत ने सवाल किया कि डीएफओ को काम रोकने का अधिकार किसने दिया? जब मोटर मार्ग की सभी पत्रावलियां विभागीय मंत्री के माध्यम से गईं, तो फिर रोक लगाने से पहले पत्रावली मुझे क्यों नहीं भेजी गईं, सरकार निर्णय लेती। उन्हें निर्णय लेने का अधिकार किसने दिया? सरकार एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट में जाती।
वन मोटर मार्ग के राजाजी टाइगर रिजर्व एरिया में होने का हवाला देते हुए पीसीसीएफ से मार्ग पर रोक लगाने की संस्तुति करने वाले डीएफओ पर वन मंत्री जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि डीएफओ को मीडिया की सुर्खियों में रहने का बहुत शौक है। उनकी संस्तुति पर पीसीसीएफ ने भी काम रोकने वाली पत्रवाली सीधे लोनिवि को भेज दी।
अधिकारी पहले गलत थे या अब गलत हैं
वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने मोटर मार्ग की पूर्व में स्वीकृतियां प्राप्त कीं, जिनके आधार पर शासनादेश हुए। अब वही अधिकारी मोटर मार्ग पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं। या तो वे पहले गलत थे, या अब गलत हैं। ऐसे अधिकारी प्रदेश का भला नहीं कर सकते। लोनिवि ने टेंडर कर दिए। तीन किमी सड़क बन गई। पुलों का निर्माण हो गया। जनता के जो साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, उस पैसे की जवाबदेही किसकी है?
आहत वन मंत्री ने कहा कि वे फक्कड़ मिजाज के हैं, उन्हें कोटद्वार और प्रदेश की जनता के लिए यदि हजार बार भी मंत्री पद छोड़ना पड़े तो छोड़ देंगे। उन्हें मंत्री बने रहने का कोई शौक नहीं है। हरक सिंह रावत की कोई हैसियत नहीं है, लेकिन विधायक और मंत्री होने के नाते उनकी जनता के प्रति जवाबदेही है। यदि अधिकारी सड़क का काम रोकेंगे तो वे आमरण अनशन करेंगे। कोटद्वार की जनता की अनदेखी नहीं होने देंगे। वे हर षड़यंत्र का मुकाबला करेंगे।
पीसीसीएफ विदेश चले गए.. तब जीव जंतुओं से प्यार कहां चला गया
वन मंत्री ने कहा कि टाइगर रिजर्व का हवाला देकर पीसीसीएफ जयराज ने वन मोटर मार्ग का कार्य रोके जाने के संबंध में पत्र लिख दिया, लेकिन जीव जंतुओं के प्रति उनका ये प्यार तब कहां चला गया जब वे विदेश चले गए और जंगल में आग लग रही है।
ब्यूरोक्रेसी वन मंत्री को बाईपास कर रही है, किसकी शह पर, जो यह हो रहा है। मैं समझता हूं कि हरक सिंह रावत को पता चल गया होगा, अब। उनके खिलाफ मोर्चा खोलें, लड़ाई लड़ें। वे साहस दिखाएं। बैठे आमरण अनशन पर। सड़क के लिए हम कांग्रेस के लोग भी साथ रहेंगे। त्यागें मंत्री पद। छोड़े भारतीय जनता पार्टी को।
-प्रीतम सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मंत्री स्पष्टीकरण ले सकते हैं। उनके हाथ में बहुत बड़ी ताकत है। मंत्री अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है। उन्हें स्पष्टीकरण लेने का अधिकार है। मुख्यमंत्री से शिकायत कर सकते हैं।
-अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा