आरोप यह भी है कि इसी संपत्ति पर जिला सहकारी बैंक से 12 लाख का लोन लिया गया है। इसके बाद इस संपत्ति पर लोन नहीं होने का प्रमाणपत्र भी बनवा लिया गया है। आरोप है कि जालसाजी कर हैसियत प्रमाणपत्र बनवाकर नगर निगम समेत अन्य विभागों में लाखों के टेंडर हासिल कर लिए गए हैं।
उन्होंने मामले की जांच पूरी होने तक टेंडर और इससे जुड़े भुगतान आदि की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं, एसडीएम गोपाल सिंह चौहान का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में होगी।