सरकारी जमीन पर दशकों तक तय रणनीति के तहत अवैध कब्जा किया गया है, जिसे पूर्व में यूपी, उत्तराखंड की विपक्षी सरकारों का संरक्षण प्राप्त हुआ था। चूंकि रेलवे की तरफ से किए गए वाद पर हाईकोर्ट की ओर से कार्रवाई के आदेश का प्रदेश सरकार पालन कर रही थी लेकिन कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए।
अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में भी स्पष्ट हुआ है कि वहां बसे हुए अधिकांश लोग अवैध कब्जेदार हैं। जिनका कोई भूमि अधिकार नहीं है कि वे रेलवे विकास योजनाओं के खिलाफ जाएं। इससे पूर्व ही सरकार और रेलवे की ओर से वहां के पीड़ित परिवारों के पुनर्वास को लेकर संविधान प्रद्धत योजनाएं प्रस्तुत की गईं थीं।
कुछ कट्टरपंथियों और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से उन्हें भड़काया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। भट्ट ने गोठ खत्तों को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को झूठा शो करार दिया। उन्होंने सभी समुदायों के अधिकारों के सरंक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताई।