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भाजपा कोर कमेटी बैठक: मंत्रियों से लेकर पदाधिकारियों को हिदायत, पार्टी फोरम से बाहर मामला उठाया तो अनुशासनहीनता

Sun, 04 Oct 2020 09:34 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • राज्यमंत्री रेखा आर्य, विधायक चैंपियन, कर्णवाल, फर्त्याल विवाद से सबक
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बीजेपी बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड की राज्यमंत्री रेखा आर्य, पार्टी विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, देशराज कर्णवाल और पूरन फर्त्याल के विवादों से सबक लेते हुए भाजपा ने अपने विधायकों, पदाधिकारियों व सरकार के मंत्रियों को हिदायत दे दी है। पार्टी की कोर कमेटी ने ताकीद किया है कि पार्टी फोरम से बाहर यदि कोई मामला उठाएगा तो उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।

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पिछले काफी समय से पार्टी को सार्वजनिक मंचों पर अपने नेताओं की बेबाक बयानबाजी को लेकर असहज होना पड़ा है। उनके बयानों से जुड़े विवादों पर पार्टी को कारण बताओ नोटिस जारी करने पड़े थे। अनुशासन के मामले में दूसरे दलों से खुद कोे अनूठी और अलग बताने का दावा करने वाली भाजपा की इन मसलों से कई बार किरकिरी हुई। प्रदेश सरकार को भी कुछ अवसरों पर असहज होना पड़ा है।

रविवार को बीजापुर स्थित सेफ हाउस में कोर कमेटी की बैठक में अनुशासन का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक पूरन फर्त्याल के विवाद के बहाने उठे इस मसले पर कोर कमेटी ने पार्टी के जिम्मेदार नेताओं की सार्वजनिक रूप से विवादित बयानबाजी पर अंकुश लगाने की आवश्यकता जताई।
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प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश की मौजूदगी में पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे कोई भी मामला (विवाद) सबसे पहले पार्टी फोरम पर रखेंगे। वे किसी अन्य स्थान पर यह मामला नहीं उठाएंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भगत के मुताबिक यदि इस बात का उल्लंघन किया जाता है तो वह अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा।

विवाद जिनसे पार्टी हुई असहज

चैंपियन विवाद : भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को पार्टी ने आपत्तिजनक बयान पर निष्कासित कर दिया था। वह पूरे एक साल पार्टी से बाहर रहे। बाद में उनकी वापसी हुई।

चैंपियन बनाम कर्णवाल विवाद : भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन और देशराज कर्णवाल की एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी को लेकर पार्टी को उन्हें कारण बताओ नोटिस देना पड़ा था।

पूरन फर्त्याल विवाद : विधायक पूरन फर्त्याल ने मीडिया में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस को लेकर प्रश्न खड़े किए थे। विपक्ष को इस बहाने सरकार पर हमला बोलने का अवसर मिला। पार्टी को उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस देना पड़ा।

 रेखा आर्य विवाद : राज्यमंत्री रेखा आर्य ने अपने मंत्रालय में आईएएस अधिकारी के खिलाफ पुलिस में तहरीर दे दी। इसे लेकर खासा विवाद गहरा गया। कुछ मंत्री भी रेखा आर्य के समर्थन में आ गए। मंत्री बनाम अफसरशाही के हालातों से सरकार असहज हो गई। मुख्यमंत्री के दखल के बाद विवाद थमा।

कैबिनेट विस्तार पर केंद्रीय नेताओं से बात करेंगे मुख्यमंत्री

प्रदेश कैबिनेट विस्तार का मामला रविवार को भाजपा कोर कमेटी की बैठक में आया। कोर कमेटी में तय हुआ कि अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत केंद्रीय नेताओं से बात कर कैबिनेट विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेंगे। नवरात्रि में कैबिनेट विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

 इससे पूर्व 17 नवंबर को नवरात्रि पर पार्टी अपने नए प्रदेश कार्यालय का शिलान्यास करेगी। कोर कमेटी की बैठक में आए इस विषय पर निर्णय ले लिया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा वर्चुअल माध्यम से नए कार्यालय भवन का भूमि पूजन और शिलान्यास कर आधारशिला रखेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के मुताबिक, देहरादून में रिंग रोड के पास स्थित भूमि के पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
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मुख्य शाही स्नान के लिए कूपन व्यवस्था पर हो रहा विचार : कौशिक

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि अगले साले हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेला के मुख्य शाही स्नान में श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने के लिए सरकार कूपन व्यवस्था पर विचार कर रही है। हरिद्वार के घाटों की क्षमता के आधार पर संख्या तय होगी। यह संख्या एक दिन में 35 से 50 लाख भी हो सकती है। 

रविवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में शहरी विकास मंत्री ने कहा कि कुंभ मेेला में शाही स्नान का समय निश्चित होता है। इस समय हरकी पैड़ी में आम लोगों के लिए स्नान नहीं होता है। बाकी जगह आम लोगों के लिए स्नान हो सकता है। वैरागी के बाद हरकी पैड़ी भी आम लोगों के खुल जाता है। यही परंपरा सदियों से चली आ रही है। 

कुंभ मेला में मुख्य स्नान के दिन एक से दो करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है। इसे देखते सरकार मुख्य स्नान के लिए हरिद्वार के घाटों की क्षमता के आधार पर एक दिन में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने विचार कर रही है। सामान्य दिनों में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं रहेगी।
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