भूमि का दूसरा उपयोग करना चाहते हैं निवेशक
सूत्रों के मुताबिक, तय समय-सीमा में भूमि का उपयोग नहीं कर पाए निवेशक सरकार से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि उन्हें भूमि का दूसरा उपयोग करने की अनुमति मिले। वे पर्यटन, स्वास्थ्य व सेवा क्षेत्र में भूमि का उपयोग करना चाहते हैं। लेकिन दिक्कत की बात यह है कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए यहां पेच फंसा हुआ है।
नए कानून में शामिल होने हैं स्थानीय भू-कानून
राज्य का अब एक नया संशोधित भू-कानून बनाने के लिए सरकार को सभी स्थानीय भू-अधिनियमों को इसमें शामिल करना है। कुमाऊं मंडल में कुमाऊं जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार कानून 1966 लागू है। इसी तरह गढ़वाल में जौनसार बावर जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार एक्ट 1956 है। इन दोनों अधिनियमों में स्थानीय भूमि से संबंधित प्रावधान हैं। इन दोनों कानूनों पर शासन ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडलायुक्तों से मंतव्य मांगा है।
अगले हफ्ते बैठक में होगा मंथन
भू-कानून समिति की सिफारिशों के आलोक में नए भू-कानून के बारे में अगले हफ्ते बैठक होगी। इस बैठक में अधिनियम को लेकर मंथन होगा। साथ ही स्थानीय भू-कानूनों के बारे में चर्चा होगी।
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स्थानीय भू-कानूनों को कैसे शामिल करेंगे, इस बारे में मंडलायुक्तों से मंतव्य मांगा गया है। अगले हफ्ते में इस बारे में एक बैठक होगी। जिस भूमि का तय समय में उपयोग नहीं हो पाया है वह रोजगारपरक उद्योग, पर्यटन व स्वास्थ्य के क्षेत्र के साथ कैसे जुड़े, इस बारे में भी विचार होना है।- सचिन कुर्वे, सचिव राजस्व।