जल्द ही उत्तराखंड की पारंपरिक गांधी टोपी नए स्वरूप में बाजार में नजर आएगी। हिमालयी विरासत को संजोने में जुटे शुक्ला दपंति ने यहां की संस्कृति और सभ्यता की पहचान रही गांधी टोपी को फिर से नए दौर के हिसाब से युवाओं को आकर्षित करने व स्थानीय बुनकरों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए इसे नमूने के तौर पर तैयार करवाया है। हर किसी को आकर्षित करने वाली उत्तराखंड की यह पारंपरिक टोपी दिसंबर माह तक बाजार में आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
सोहम आर्ट एवं हेरिटेज सेंटर मसूरी के संचालक समीर एवं कविता शुक्ला ने विश्व पर्यटन दिवस पर उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी गांधी को आधुनिक स्टाइल में बाजार में लोगों के सामने लाने की पहल की है। फिलहाल नमूने के तौर पर विभिन्न कलरों की तीन टोपियों का सैंपल तैयार कर लिया है। जिसमें टोपी के पारंपरिक स्वरूप को यथावत रखते हुए उसमें राज्य पुष्प ब्रह्मकमल का ब्रोच तथा विभिन्न रंगों की एक पट्टी स्मृति चिह्न के रूप में बनाई है।