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उत्तराखंड: सैनिक कल्याण योजनाओं में मॉडल बन रहा प्रदेश, अग्निवीर रोजगार सेल का गठन करने वाला देश का पहला राज्य

Sat, 29 Aug 2026 04:01 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान के साथ उनके भविष्य को संवारने में उत्तराखंड नई मिसाल कायम कर रहा है। अग्निवीरों के लिए रोजगार सेल से लेकर सरकारी सेवाओं में आरक्षण तक, राज्य की पहल दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन रही है।

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सीएम धामी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सैनिक कल्याण के क्षेत्र में उत्तराखंड देश के दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन रहा है। सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में उत्तराखंड अग्रणी है। सेना में चार वर्ष सेवाएं देने के बाद घर वापसी करने वाले अग्निवीरों के लिए अलग से रोजगार सेल बनाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने सैनिक कल्याण को प्राथमिकता दी है। सरकार के फैसले और लागू की गई योजनाएं आज दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन रही हैं। हाल ही में धामी कैबिनेट ने अग्निवीरों के लिए रोजगार सेल को मंजूरी दी है। यह सेल अग्निवीरों को रोजगार दिलाने में उनकी मदद करेगा। अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला पूर्व में ही सरकार ले चुकी है।

देश की रक्षा में बलिदान देने वाले वीर शहीदों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। शहीदों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए सरकार ने यह अहम फैसला लिया है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ की गई है। अन्य सभी बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किया गया। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि को भी बढ़ाया गया है।

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जल्द ही जनता को समर्पित होगा सैन्य धाम

देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब जल्द ही इसके लोकार्पण की तैयारी है। राज्य के शहीद सैनिकों की याद में धामी सरकार ने सैन्य धाम का निर्माण कराया है। शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी को सैन्य धाम में सम्मान पूर्वक लाया गया है। सभी बलिदानियों की शौर्य गाथाएं भी यहां लिखी गई हैं।

28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी

धामी सरकार प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे रही है। 28 ऐसे पात्र आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही आवेदन की समय सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।

स्टांप शुल्क में छूट

सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर स्टांप शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। सैनिकों एवं पूर्व सैनिक परिवारों के साथ भूमि धोखाधड़ी के मामले जिला अदालतों में लंबित हैं। प्रदेश सरकार इस मामले में भी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आगे आई है।

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सरकार वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। शहीदों के आश्रितों और परमवीर चक्र विजेताओं के परिवार को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि के साथ ही सैनिक कल्याण के लिए ऐतिहासिक फैसले सरकार ने लिए हैं। सैन्य धाम हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक बनेगा। -पुष्कर सिंह धामी,मुख्यमंत्री

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