कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार ने शासन को पत्र भेजकर कहा था कि चूंकि मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ विजिलेंस जांच गतिमान है। उनके कुलसचिव पद पर बने रहने से उनके खिलाफ नियम विरुद्ध नियुक्ति, वित्तीय अनियमितताओं, घोटालों से संबंधित जांच और विजिलेंस जांच प्रभावित हो सकती है। इसी को आधार मानते हुए सचिव शैलेश बगोली ने उन्हें तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
आदेश के तहत कहा गया है कि निलंबन अवधि में डॉ. मिश्रा को वित्तीय नियम संग्रह के प्रावधानों के तहत जीवन निर्वाह के लिए आधा वेतन दिया जाएगा। यह सभी भुगतान केवल तभी किया जाएगा जबकि डॉ. मिश्रा इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या व्यवसाय से पैसा नहीं कमा रहे हैं।