कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं से हुआ 30 हजार करोड़ का कारोबार : निशंक
दीक्षांत समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि आयुर्वेद को भारत के साथ ही पूरी दुनिया में पहुंचाने की जरूरत है। गंगा, आयुर्वेद, योग का जन्म उत्तराखंड में हुआ है जो हम सब के लिए गर्व का विषय है। युवा पीढ़ी तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में अपना हर संभव योगदान दें। निशंक ने कहा कि कोरोना काल के दौरान पूरे देश में आयुर्वेदिक दवाओं का 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ है, जिससे साबित होता है कि आयुर्वेद के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है।
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति भारत की पहचान : बालकृष्ण
दीक्षांत समारोह में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति भारत की पहचान है। आयुर्वेद भारत समेत पूरी दुनिया में फैले इसके लिए इसके उत्थान और कल्याण के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। जिसकी जिम्मेदारी आयुर्वेद चिकित्सकों पर है। कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है जो हम जो हर भारतवासी के लिए गर्व का विषय है।
इन्हें मिलीं डिग्रियां
दीक्षांत समारोह के दौरान स्नातकोत्तर के 692 और बीएमएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस के 1006 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां बांटी र्गइं। जिसमें एमडी और एमएस आयुर्वेद में साल 2015 से लेकर साल 2022 तक के छात्र शामिल रहे। जबकि बीएमएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस के साल 2018, 2019 और 2020 के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।