आपराधिक मामलों में ऑडियो वीडियो की जांच के लिए जल्द ही केंद्रीय फॉरेंसिक लैब (सीएफएसएल) का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। इस साल से ही प्रदेश की फॉरेंसिंक लैब में ऑडियो वीडियो जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए उपकरणों की खरीद की जा रही है। इसके साथ ही विशेषज्ञों की भर्ती के लिए प्रतिनियुक्ति पर आवेदन मांगे गए हैं।
दरअसल, किसी भी विवादित या आपराधिक मामलों में ऑडियो और वीडियो की सत्यता की परख फॉरेंसिक साइंस से ही की जाती है। इसके लिए राज्य बनने के बाद से अब तक फॉरेंसिंक लैब में कोई व्यवस्था नहीं है। जांच के लिए वॉयस सैंपल चंडीगढ़ या दिल्ली की लैब में भेजा जाता है। लेकिन, वहां जांच जल्दी पूरी हो इसकी कोई गारंटी नहीं होती है। कारण है कि ये लैब सीबीआई व अन्य केंद्रीय एजेंसियों के लिए काम करती है। लिहाजा, वहां की जांचों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में बेवजह जांच रिपोर्ट आने में महीनों से साल तक गुजर जाते हैं।
लेकिन, अब देहरादून मे भी यह लैब अस्तित्व में आ जाएगी। दो साल पहले इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया था। डायरेक्टर एफएसएल अमित सिन्हा ने बताया कि प्रस्ताव मंजूरी के बाद अब उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही विशेषज्ञों की भर्ती जब तक स्थाई रूप से नहीं हो जाती तब तक के लिए प्रतिनियुक्ति पर आवेदन मांगे गए हैं। इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। केवल ऑडियो वीडियो के लिए ही नहीं बल्कि तमाम जांच प्रक्रियाओं के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
20 साल से नहीं हुई कोई भर्ती, अभी हैं केवल सात वैज्ञानिक
राज्य बने 20 साल होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश से अलग होने के छह साल बाद 2006 में उत्तराखंड में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की गई थी। उस वक्त उत्तराखंड के हिस्से महज सात वैज्ञानिक आए थे। इन्हीं के भरोसे अब तक सारी व्यवस्था चल रही है। इनमें से छह देहरादून मुख्य लैब और एक रुद्रपुर लैब में तैनात हैं। एफएसएल को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग विधाओं के लिए 22 वैज्ञानिकों और 19 जूनियर स्टाफ की भर्ती की जाएगी। यह प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय की ओर से शासन को भेज दिया गया था। इस पर अब शासन को ही निर्णय लेना है। एफएसएल में कुल 105 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से लगभग 50 पद खाली हैं।
कंप्यूटर फॉरेंसिक भी जल्द होगी शुरू
अब तक साइबर अपराधों में वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए सैंपल सेंटर फोरेंसिक लैब चंडीगढ़ भेजा जाता था। दून और आसपास में इस तरह के अपराध बढ़ने पर यहां भी साइबर फोरेंसिक की जरूरत महसूस होने लगी थी। पिछले साल कंप्यूटर फॉरेंसिक के लिए भी शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। यह भी मंजूर हो चुका है और जल्द ही विशेषज्ञ आने के बाद इसकी भी शुरूआत की जाएगी।
ये होती हैं अभी तक जांच
डीएनए
सीरोलॉजी (खून से संबंधित)
बायोलॉजी
बैलेस्टिक
फिजिक्स
दस्तावेजी
केमिस्ट्री
नारकोटिक्स
ये मांगे गए हैं प्रनियुक्ति पर आवेदन
दस्तावेजी जांच- एक विशेषज्ञ
डीएनए- दो विशेषज्ञ
कंप्यूटर फॉरेंसिक- एक विशेषज्ञ
केमिस्ट्री- एक विशेषज्ञ