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विस सत्र का तीसरा दिन: राज्य गठन से पहले के 1.10 लाख पेंशनरों को संशोधित पेंशन का तोहफा

Fri, 06 Dec 2019 06:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत मिलेगी पेंशन
  • सरकार पर आएगा करीब 180 करोड़ रुपये का व्ययभार
  • संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने सदन में की घोषणा
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रदेश सरकार ने राज्य गठन से पहले सेवानिवृत्त होने वाले 1.10 लाख कर्मियों को एक नवंबर 2018 की जगह एक जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन देना स्वीकार कर लिया है। इससे सरकार पर करीब 180 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार पड़ेगा। सरकार से कहा गया था कि इन पेंशनरों की पेंशन का कुल व्यय भार का पांच प्रतिशत ही उत्तराखंड को उठाना होगा। शेष 95 प्रतिशत व्ययभार उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी।

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सदन में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने यह सवाल उठाया। विधायक का कहना था कि राज्य गठन से पूर्व सेवानिवृत्त कर्मियों को सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के आधार पर संशोधित पेंशन एक नवंबर 2018 से दिया जाना स्वीकार किया गया है।

इन कार्मिकों को पेंशन उत्तराखंड की ओर से दी जाती है लेकिन प्रदेश सरकार को मात्र पांच प्रतिशत ही व्यय भार उठाना होता है। शेष 95 प्रतिशत उत्तर प्रदेश की ओर से वहन किया जाता है। विधायक ने पूछा कि क्या सरकार केवल पांच प्रतिशत व्यय भार उठाने में सक्षम नहीं है। इन कार्मिकों को एक जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन दी जानी चाहिए और संगठन के स्तर पर भी यही मांग की जा रही है।
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150 बसों की खरीद के मामले में नियम 310 में चर्चा की मांग

वहीं विपक्ष ने सुबह प्रश्नकाल से पूर्व 150 बसों की खरीद के मामले में नियम 310 में चर्चा की मांग को स्पीकर ने नियम 58 में परिवर्तित कर दिया। भोजनावकाश के बाद जब सत्र शुरू हुआ तो नेता प्रतिपक्ष ने निगम की 150 नई बसों में गंभीर तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें परिवहन निगम के कर्मचारियों ने एक वीडियो भेजकर यह जानकारी दी गई है कि नई बसों के लीवर और गियर हाथ में आ रहे हैं।

चालकों और परिचालकों ने दुर्घटनाओं के भय से बसों को चलाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार की संभावना है इसलिए इसकी जांच एसआईटी से कराई जाए। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, करन माहरा, हरीश धामी, ममला राकेश, राजकुमार व मनोज रावत ने भी बस खरीद में भ्रष्टाचार होने की आशंका जताई।

उन्होंने कहा कि एक बस की लागत 24 लाख है और ये 36 करोड़ की बसों को खरीदने का मामला है। उन्होंने इसकी एसआईटी से जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में लिप्त है। जवाब में परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि बसें टाटा सरीखी प्रतिष्ठित कंपनी से खरीदी गई। इसके लिए आन लाइन वित्तीय निविदा प्रक्रिया अपनाई गई। प्रमुख अखबारों के माध्यम से एक्प्रेस ऑफ इंटरेस्ट मांगे गए। परिवहन निगम की तकनीकी टीम से बसों का परीक्षण कराया गया।

आटोमेटिक रिसर्च ऑफ इंडिया 300 में से 150 बसों की आपूर्ति हो गई। 125 बसों को सड़कों पर उतार दिया गया। ये सभी बसें पर्वतीय क्षेत्र के लिए थीं। सरकार के संज्ञान जैसे तकनीकी खराबी का मामला आया, सभी बसों का संचालन तत्काल रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि कंपनी को बसों की खरीद का कोई भुगतान नहीं हुआ है। उलटे कंपनी के 1.91 करोड़ रुपये सरकार के पास बैंक गारंटी के तौर पर हैं।

टाटा मोटर्स को तत्काल तकनीकी गड़बड़ी को दूर करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई राजस्व हानि नहीं हुई है।

वेतन, भत्तों के लिए 14 हजार करोड़ की है व्यवस्था 

इस सवाल का लिखित में जवाब मुख्यमंत्री की ओर से दिया गया था और उसमें कहा गया कि राज्य के वित्तीय संसाधन पर निर्भर करेगा कि इन कार्मिकों को 2016 से संशोधित पेंशन दी जा सकती है या नहीं।

सदन में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने इस सवाल का जवाब दिया और कहा कि सरकार इन कार्मिकों को 2016 से सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के आधार पर संशोधित पेंशन देने के लिए तैयार है। कौशिक ने कहा कि करीब 1.10 लाख पेंशनरों को इससे फायदा होगा और सरकार को करीब 180 करोड़ रुपये का व्ययभार वहन करना पड़ेगा। 

कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर बजट 2019-20 में लगभग 14513.75 करोड़ रुपये का अनुमान था। वेतन और भत्तों पर अक्टूबर 2019 तक लगभग 8306.71 करोड़ रुपये खर्च हुए है। यह बजट अनुमान का 57.23 प्रतिशत है। अभी चार माह का वेतन दिया जाना बाकी है।

इस पर अनुपूरक में भी कर्मचारियों के वेतन के लिए व्यवस्था की गई है। ऐसे में वित्त का अनुमान है कि इस मद में पैसे बचेंगे। अनुपूरक बजट में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों के लिए पैसे की व्यवस्था करते समय वित्त ने कुल खर्च का अनुमान लगाया तो सामने आया कि इस मद में की गई व्यवस्था पर्याप्त है।

प्रदेश में 6.5 लाख किसानों को पीएम सम्मान निधि का लाभ

विधानसभा सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल कई सवालों के जवाब कागजों में खोजते रह गए। विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कोई रहम नहीं किया। हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री और नेता सदन की मौजूदगी से माहौल कुछ हद तक बदला और ट्रेजरी बैंच को राहत मिली।

नेता सदन की मौजूदगी का ही शायद सबब था कि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कुछ मामलों में मेज थपथपाई। इतना होने के बाद भी कृषि मंत्री ऐेसा कुछ बोल ही गए जिससे विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिला। सदन में कुल 68 सवाल आए और इनमें से 12 तारांकित सवालों के जवाब ट्रेजरी बैंच की तरफ से आए........

देहरादून सीवर लाइन मामले में सचिव करेंगे जांच

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और देहरादून कैंट विधायक हरबंश कपूर ने देहरादून में एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से 2008 में सीवर लाइन बिछाने की योजना को लेकर सवाल उठाया। कपूर का कहना था कि योजना में 128 किलोमीटर लाइन डाली जानी थी, लेकिन पड़ी करीब 75 किलोमीटर।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी माना कि 10500 घरों को कनेक्शन दिया जाना था, लेकिन कनेक्शन 8500 घरों को ही दिया जा सका। यह योजना 2018 में पूरी हो गई और अब इसके अगले चरण में शेष बचे हुए घरों को कनेक्शन दिया जाएगा। धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने भी इस योजना पर सवाल उठाया तो शहरी विकास मंत्री ने कहा कि वे सचिव को आदेश देंगे कि इस मामले की जांच कराएं।

हल्द्वानी के किसान भवन का उपयोग किसान ही नहीं कर पाते

भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा ने सवाल तो किसानों की आय को दोगुना करने को लेकर पूछा था लेकिन अनुपूरक बजट में उन्हाेंने हल्द्वानी में किसान भवन का उपयोग किसानों की ओर से ही न कर पाने का मामला उठाया। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि ऐसा है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान भवन का उपयोग किसान ही करें। 

कैड़ा दिलवाएंगे जमीन मंडी बनाएगी सरकार 

भीमताल विधायक रामसिंह कैड़ा की ओर से सदन में भीमताल में भूमि उपलब्ध कराने का इरादा जताने पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जमीन उपलब्ध हुई तो भीमताल में मंडी बनाई जाएगी। सुबोध उनियाल का कहना था कि भीमताल में जमीन न होने के कारण मंडी नहीं खुल पा रही है। इस पर कैड़ा ने कहा कि वे जमीन उपलब्ध कराएंगे। सुबोध ने जमीन की शर्त पर ही भीमताल में ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ के बीच मंडी के साथ ही कोल्डस्टोरेज स्थापित करने का भी आश्वासन दिया।
 
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पतंजलि 16 हजार करोड़, सरकार का सिर्फ 6 करोड़ का जड़ी बूटी व्यवसाय 

जड़ी बूटी व्यवसाय की पूरी क्षमता का उपयोग करने के सवाल पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल सदन में उलझे हुए नजर आए। टिहरी विधायक धन सिंह नेगी ने पूछा था कि जड़ी बूटी के विपणन की क्या व्यवस्था है। यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी ने बजट नहीं होने के कारण किसानों को पौध नहीं मिल रही है। यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने भी इस पर सवाल उठाया।

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पांच नाली भूमि पर जड़ी बूटी के लिए सरकार निशुल्क पौध उपलब्ध कराती है। इस पर रानीखेत विधायक करन माहरा ने पूछा कि जड़ी बूटी का कुल कितना व्यवसाय हो रहा है। इस पर मंत्री ने बताया कि कुल 6.20 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया गया है। करन माहरा का कहना था कि पतंजलि 16 हजार करोड़ का व्यवसाय कर रहा है और सरकार सिर्फ छह करोड़ का। मंत्री ने कहा कि अब पूरी क्षमता का दोहन करने की योजना बनाई गई है। 

आलू फार्म पर घिरे सुबोध, मांग और आपूर्ति का अंतर पूछा विधायकों ने

धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार की ओर से धनोल्टी आलू फार्म के संबंध में पूछे गए सवाल पर मंत्री सुबोध उनियाल हड़बड़ाए नजर आए। प्रीतम पंवार का कहना था कि आलू का बीज पर्याप्त नहीं है। विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि मांग और आपूर्ति का अंतर सामने रखा जाएगा तो स्थिति स्पष्ट होगी। मंत्री को बताना पड़ा कि कुल मांग 5756 क्विंटल की है और आपूर्ति 2058 क्विंटल की हो रही है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के आलू के बीज उत्पादन पर रोक लगा दी गई है। 

पीएम सम्मान निधि में 645948 किसानों को लाभ 

धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार के पीएम सम्मान निधि से संबंधित सवाल के जवाब में मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि प्रदेश में कुल मिलाकर 645948 किसानों को इस योजना का लाभ मिला है। उनके खातों में 345.06 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई। 

12 हजार किसानों को चाय की खेती से मिलेगा फायदा 

टिहरी विधायक धन सिंह नेगी के सवाल के जवाब में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि प्रदेश में 11 पर्वतीय जिलों के 38 विकास खंडों में बंजर जमीन पर चाय की खेती की योजना शुरू की गई है। इस योजना से 4481 किसानों को जोड़ लिया गया है और अब 12 हजार उत्पादकों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। लालकुंआ विधायक नवीन दुम्का, विधायक चंदनराम दास, चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने इस योजना को लेकर सवाल उठाए तो सुबोध कागजों को टटोलते नजर आए। 
 
टीडीसी को लाएंगे फायदे में

किच्छा विधायक राजेश शुक्ला के सवाल के जवाब में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि तराई बीज विकास निगम को फायदे में लाने के लिए योजना बनाई गई है। जुलाई और अगस्त 2019 का 1.81 करोड़ रुपये का वेतन भुगतान होना शेष है। 
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