कागजों की होगी बचत
कहा, ई-विधानसभा बनाने से कागजों की बचत होगी। विधानसभा कार्यों में बहुत से दस्तावेजों का उपयोग किया जाता है। इससे काफी खर्चा आता है, लेकिन ई-विधानसभा के माध्यम से दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे कागजों की बचत हो सकती है। साथ ही ई-विस के माध्यम से दस्तावेजों को आसानी से संग्रहित किया जा सकता है। कम कागजों के उपयोग से पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।
कहा, जल्द ही उत्तराखंड विधानसभा को ई-विधानसभा के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश में ई-विस में इस्तेमाल तकनीक का अध्ययन कर लिया गया है। यूपी की ई-विस का अध्ययन कर उत्तराखंड विस को भी ई-विधानसभा बनाया जाएगा। उत्तराखंड बनने से अभी तक की जितने भी विधानसभा सदन चले हैं, की पूरी जानकारी भी एक जगह डिजिटल संग्रहित की जाएगी।
बैठक में विधायक उमेश कुमार काऊ, खजान दास, वीरेंद्र कुमार, मोहम्मद शहजाद, राजकुमार पोरी, अपर सचिव सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विजय कुमार, अपर सचिव वित्त अरुणेंद्र चौहान, विधानसभा प्रभारी सचिव हेम पंत, अनु सचिव विधानसभा संजय कुमार रावत आदि मौजूद थे।