उत्तराखंड की जनभावना के प्रतीक गैरसैंण के कदम स्थायी राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में गैरसैंण बड़ा चुनावी मुद्दा होगा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि कांग्रेस चुनाव में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के वादे के साथ चुनाव में जाएगी।
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इन सियासी संभावनाओं के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की गैरसैंण के लिए एक के बाद एक सौगात को कांग्रेस के गैरसैंण एजेंडे पर प्रहार के तौर पर देखा जा रहा है। ऑलवेदर रोड, रेल और हवाई कनेक्टिविटी, गैरसैंण में नियोजित टाउनशिप बनाने की दिशा में राज्य सरकार की इच्छा शक्ति यह संकेत कर रही है कि देर सबेर गैरसैंण को स्थायी राजधानी जैसा स्वरूप दिया जा सकता है।
पिछले साल चार मार्च को सरकार ने राज्य गठन की भावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी। ठीक एक साल के बाद ग्रीष्मकालीन राजधानी की वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को प्रदेश की तीसरी कमिश्नरी का दर्जा देने की घोषणा की है। चुनावी वर्ष में कांग्रेस भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने को मुद्दा बना रही है। राज्य गठन के 20 सालों के बाद गैरसैंण के स्थायी राजधानी की ओर से कदम बढ़ रहे हैं।
कर्णप्रयाग से भराड़ीसैंण तक डबल लेन होगी सड़क
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के लिए कर्णप्रयाण से आगे की सड़क अभी सिंगल है। सरकार ने दिवालीखाल से कर्णप्रयाग और दिवालीखाल से भराड़ीसैंण की सड़क को डबल लेन की मंजूरी दी है। इस सड़क बनने के बाद गैरसैंण पहुंचना आसान होगा।
25 हजार करोड़ के निवेश का एलान
गैरसैंण के विकास के लिए सरकार ने 25 हजार करोड़ के निवेश का एलान किया है। बुनियादी ढांचे, रोजगार, स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। इससे साफ है कि सरकार की मंशा गैरसैंण का विकास करने की है।
गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन राजधानी बनाने का वादा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूरा किया है। गैरसैंण उत्तराखंड के लोगों की जनभावनाओं का प्रतीक है। गैरसैंण का सुनियोजित विकास करने के लिए सरकार करोड़ों की योजनाओं पर काम कर रही है।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता