रेसकोर्स स्थित विधायक हॉस्टल में कांग्रेस विधायक करन मेहरा के कमरे में लगी आग का खुलासा न होने पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि विधायक हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं और न ही फायर अलार्म काम कर रहा है। विधायक के कमरे में आग कैसे लगी है। इसका आज तक खुलासा नहीं हुआ।
विपक्ष ने इन घटनाओं पर मांगा जवाब
-दून के बसंत विहार में शराब ठेके के सेल्समैन से लूट।
-ऋषिकेश में व्यापारी की पत्नी से सोने के गहनों की लूट।
-दून के सरस्वती विहार में सराफ से की गई लाखों की लूट।
-ऋषिकेश में सराफ से 55 लाख रुपये लूटने की वारदात।
-प्रेमनगर में पेट्रोप पंप मालिक से 12 लाख रुपये की लूट।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि राज्य आंदोलनकारियों की सुविधा में कटौती का उसका कोई इरादा नहीं है। वह उनके सम्मान और उन्हें सुविधा देने के प्रति वचनबद्ध है। सरकार ने साफ किया है कि परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा जारी रहेगी। इससे पहले विपक्ष ने सरकार पर आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया। विपक्ष ने कहा कि पीठ ने 24 नवंबर, 2018 को सरकार को निर्देश दिए थे कि वह आंदोलनकारियों के सम्मान और सुविधा पर एक ठोस नीति बनाए, लेकिन ऐसा नहीं किया।
विपक्ष की ओर से चकराता विधायक प्रीतम सिंह भोजनावकाश से पहले नियम-58 में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है। आंदोलनकारियों को दस फीसदी क्षैतिज आरक्षण का मसला अटका है। मुफ्त यात्रा समेत अन्य सुविधाओं में कटौती की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आंदोलनकारियों की पेंशन में भी असमानता है, जो दूर होनी चाहिए। इस पर कार्यवाहक संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए लगातार काम किया है। सुविधाओं में कटौती का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
प्रश्नकाल में मंगलवार को कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और सतपाल महाराज सवालों से असहज नजर आए। समाज कल्याण, परिवहन और पर्यटन विभाग के सवालों पर विपक्ष से ज्यादा उनकी खुद की पार्टी के विधायकों ने उन्हें घेरने की कोशिश की। दोनों मंत्रियों ने अपने ही विधायकों के सवालों से खूब ‘संघर्ष’ किया। विपक्ष ने ट्रेजरी बेंच से हो रहे हमलों को आधार बना सरकार पर खूब निशाने साधे। हालांकि सरकार मिले जुले प्रयासों से हमलों को किसी तरह से झेलने में सफल रही।
पेंशन के प्रकरण से सरकार के असहज होने की शुरुआत हुई। इस प्रश्न को कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने उठाया था, लेकिन बाद में भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने इस पर मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने अपनी ही सरकार को घेरना शुरू कर दिया तो उनके प्रयास में विनोद चमोली और अन्य विधायक भी सहायक बन गए। समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य असहज नजर आए, लेकिन उन्होंने जवाब दिए।
उनकी मदद के लिए कार्यवाहक संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक भी सामने आए। इसी तरह, पर्यटन और सिंचाई विभाग से संबंधित सवालों पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की स्थिति बनी। विपक्ष और भाजपा के विधायकों ने उन्हें अनुपूरक प्रश्नों के जरिये उलझाने की कोशिश की। दो बार मांगी गई जानकारी पर महाराज ने असमर्थता जाहिर की और बाद में इसे उपलब्ध करा देने का भरोसा दिलाया।
प्रदेश सरकार अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर पात्र पति और पत्नी दोनों को वृद्धावस्था पेंशन देने पर विचार करेगी। समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए एक अनुपूरक प्रश्न के उत्तर में यह आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों में से एक को ही पेंशन देने की व्यवस्था है।
वे कांग्रेस विधायक ममता राकेश के मूल प्रश्न पर सुरेंद्र सिंह जीना द्वारा पूछे गए अनुपूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। जीना ने अनुपूरक प्रश्न पूछा कि क्या सरकार पात्र पति और पत्नी दोनों को वृद्धावस्था पेंशन देगी? इस प्रश्न के उत्तर में समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि 17 जून 2016 को तत्कालीन सरकार ने आदेश जारी किया था कि पति और पत्नी में से एक को ही पेंशन मिलेगी और पत्नी को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग द्वारा पति और पत्नी को बांटी गई पेंशन की वसूली पर भी रोक लगा दी गई।
पात्रता के लिए मासिक आय बढ़ाने पर विचार नहीं
समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ पाने के लिए आवेदकों की अधिकतम मासिक आय के मानकों को बढ़ाने पर अभी कोई विचार नहीं है। कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने पूछा था कि क्या सरकार राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना तथा नंदा गौरा योजना के समान 6000 रुपये मासिक करने पर विचार करेगी। इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि यह राज्य के वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा।