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बमुश्किल फजीहत से बची प्रचंड बहुमत की सरकार, महज 10 विधायक ही थे सदन में मौजूद

Fri, 22 Feb 2019 08:23 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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uttarakhand assembly house
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विधानसभा में बुधवार को सदन में भाजपा विधायकों की संख्या खासी कम होने की वजह से प्रचंड बहुमत वाली सरकार की फजीहत होते-होते बची। ये स्थिति तब पैदा हुई जब संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत सदन के पटल पर उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 (संशोधन) विधेयक-2019 पेश कर रहे थे।

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उन्होंने सदन में विधेयक  रखा तो विपक्ष ने उन्हें यह कहकर चुनौती दी कि सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों की संख्या कम है। हालांकि अध्यक्ष पीठ से सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने विधेयक को स्थापित करने की अनुमति दे दी। लेकिन विपक्ष बार-बार सदस्यों की गिनती करने की मांग उठाता रहा। 

घटनाक्रम के अनुसार दोपहर करीब 12 बजकर 40 मिनट पर संसदीय कार्यमंत्री पंत ने सदन से विधेयक रखने की अनुमति मांगी। उस समय में सदन में भाजपा के 57 में से महज 10 विधायक ही मौजूद थे। स्पीकर की पीठ पर आसीन डिप्टी स्पीकर को मिलाकर ये संख्या 11 थी।

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विपक्ष में कांग्रेस के नौ विधायक उपस्थित थे

जबकि विपक्ष में कांग्रेस के नौ विधायक उपस्थित थे। अध्यक्ष पीठ ने विधेयक के पक्ष में ‘हां’ की संख्या अधिक बताकर विधेयक को सदन पटल पर रखे जाने की जैसे ही अनुमति दी, कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सवाल उठा दिया कि सदन में ‘नहीं’ कहने वाले सदस्यों की संख्या अधिक है। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों की संख्या अधिक है तो धामी ने सदस्यों की गिनती करने की मांग उठा दी। उनके पक्ष में विधायक करन माहरा भी खड़े हो गए।

संसदीय कार्यमंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा कि सदन में विपक्ष के सिर्फ नौ विधायक उपस्थित हैं। इस पर कांग्रेस विधायक दल के उप नेता करन माहरा ने निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार और राम सिंह कैड़ा को भी अपने पक्ष में बताकर गिनती कराने की मांग जारी रखी। कुछ देर चली बहस के बाद डिप्टी स्पीकर ने कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए विधेयक को सदन में स्थापित करने की अनुमति दे दी। मत विभाजन का सवाल खड़े होने की बात सदन के बाहर तक पहुंची तो भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान और राजेश शुक्ला आनन फानन में सदन में पहुंचे।


 

ये विधायक थे सदन में उपस्थित 

भाजपा: कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत और अरविंद पांडेय, विधायक खजान दास, नवीन चंद्र दुम्का, बलवंत भौर्याल, दिलीप सिंह रावत, केदार सिंह रावत, मुन्नी देवी, गणेश जोशी, जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन (नामित सदस्य)। कुल 10 विधायक
कांग्रेस: इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, ममता राकेश, फुरकान अहमद, करन माहरा, आदेश चौहान, राजकुमार, हरीश धामी। कुल नौ विधायक
निर्दलीय: रामसिंह कैड़ा, प्रीतम पंवार। कुल दो विधायक
 
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कांग्रेसी के सभी विधायक होते तो तय थी फजीहत 

इस घटनाक्रम के कांग्रेस के दो विधायक काजी निजामुद्दीन और मनोज रावत भी सदन के बाहर थे। अगर ये दोनों विधायक भी उस वक्त सदन में होते तो सरकार को निश्चित रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता। उस स्थिति में कांग्रेस की ओर से सदन में मत विभाजन के लिए और अधिक जोर लगाया जाता।

केवल वित्त विधेयक पर मत विभाजन में विपक्ष की जीत पर सरकार को इस्तीफा देने की संवैधानिक बाध्यता होती है। सामान्य विधेयक में जीत पर विपक्ष सरकार को अल्पमत का बताकर महज सियासी मुनाफा लेने की कोशिश कर सकता है।
- महेश चंद्र, पूर्व प्रमुख सचिव, उत्तराखंड विधानसभा 

सदस्यों को व्हिप जारी है। उस समय शून्य काल खत्म हुआ था। ऐसे समय में सदस्य पानी पीने बाहर निकल जाते हैं। यदि मत विभाजन की स्थिति आती तो एक बेल बजती है। जिसे सुनकर सदस्य सदन में आ जाते हैं। वैसे भी सदन में हमारी संख्या विपक्ष की संख्या से एक अधिक थी। हमारे 10 सदस्य थे और एक एसोसिएट सदस्य के साथ ये संख्या 11 थी। विपक्ष के नौ सदस्य थे और एक निर्दलीय प्रीतम सिंह पंवार थे।
- प्रकाश पंत, संसदीय कार्यमंत्री
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