प्रदेश में बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। जबकि सरकार का कहना है कि उन्होंने न केवल रोजगार दिए हैं बल्कि स्वरोजगार के तहत भी तमाम योजनाओं के माध्यम से युवा लाभान्वित हो रहे हैं।
बुधवार को कार्य स्थगन के तहत नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने प्रदेश में बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सीएमआईई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर 22.3 प्रतिशत है। 2017 में जिस डबल इंजन की सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, वह वादा भूल गई। मनरेगा कर्मी, स्वास्थ्य विभाग में 108 कर्मचारी, पंचायतों के कर्मचारियों आंगनबाड़ी, आशा, ग्राम प्रहरी आदि को जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि हालात बदतर हैं। तीन सीएम आ गए लेकिन युवाओं को रोजगार नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि परिवहन निगम में कर्मचारियों का चयन आयोग करके दे रहा है लेकिन निगम उन्हें नियुक्ति ही नहीं दे रहा है। न केवल केंद्र बल्कि राज्य में सरकार रोजगार देने में विफल हुई है। विधायक राजकुमार ने कहा कि बेरोजगारी पहले से सिर पर थी, ऊपर से अब प्रवासियों को भी सरकार कोई रोजगार उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुई है। विधायक फुरकान ने भी बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। विधायक ममता राकेश ने कहा कि हरिद्वार जिले में सेवायोजन विभाग के माध्यम से चार युवाओं को ही तीन साल में रोजगार मिला है।
इस पर मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि हमारे प्रदेश में चपरासी और बाबू की नौकरी की जो परंपरा और और सोच है, उसे बदलना होगा। हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती है। लिहाजा, स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश में अब तक 8674 नौकरियां दी हैं। करीब 12 हजार पदों पर भर्ती के अधियाचन(सिफारिश) संबंधित भर्ती एजेंसियों को भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज 88 प्रतिशत पैसा केवल वेतन, पेंशन आदि पर ही खर्च हो रहा है।
प्रदेश के विकास में केवल 12 प्रतिशत का ही इस्तेमाल हो रहा है। लिहाजा, उनकी सरकार ने स्वरोजगार की दिशा में काम किया है। स्ट्रीट वेंडर योजना, मनरेगा, कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री सड़क योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राज्य पोषित कौशल विकास योजना, दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना, मोटरसाइकिल योजना, कृषि योजना, प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना, नर्सरी विकास योजना, रेशा विकास योजना, उद्योग योजना के तहत स्वरोजगार से लाखों युवाओं को लाभान्वित किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, एकल खिड़की स्वरोजगार योजना, पशुपालन, कुकुट विकास, गौ पालन, बकरी पालन, वैकल्पिक ऊर्जा, चाय बागान आदि योजनाओं से भी हजारों युवा लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं, पंचायत मंत्री अरविंद पांडेय ने भी डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि कर्मचारियों को दोबारा काम देने का आश्वासन दिया। सेवायोजन मंत्री हरक सिंह रावत के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
15833 पद खाली तो 22 हजार कहां से भरोगे: प्रीतम
नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कहा कि सरकार आज कह रही है कि 22 हजार पद भरेंगे, लेकिन जो सूचना उन्होंने प्राप्त की है, उसके अनुसार विभिन्न विभागों में केवल 15833 पद हैं। इसके जवाब में कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उनके पास केवल 32 विभागों की सूचना है।
हमारा मकसद किसी के हक-हुकूक का निरादर करना नहीं है। हमने देवस्थानम बोर्ड पर आ रहे विचारों को लेकर एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है। इसके सुझाव के आधार पर सरकार बीच का रास्ता निकालेगी। यह बात सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस वक्त कही, जब धारचूला विधायक हरीश धामी देवस्थानम बोर्ड को लेकर प्राइवेट बिल पेश कर रहे थे।
विधायक हरीश धामी सदन में बुधवार को उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन(निरसन) विधेयक 2021 लेकर आए। उन्होंने सदन से इसे पेश करने की अनुमति मांगी। इसके पीछे उन्होंने कहा कि जो पंडा-पुरोहित समाज इतने लंबे समय से हमारे चारों धाम और अन्य मंदिरों की व्यवस्था संभाल रहे हैं, सरकार उनके हितों पर कुठाराघात कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस वजह से एक ओर जहां सरकार ने व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया है तो दूसरी ओर इन धामों से जुड़ी कई परंपराओं के साथ भी देवस्थानम बोर्ड खिलवाड़ कर रहा है। लिहाजा, उन्होंने प्राइवेट बिल के माध्यम से पुरानी परंपरा को ही दोबारा स्थायी करने का उद्देश्य बताया। इस पर पहले पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वैष्णो देवी, साईं बाबा मंदिर की तरह ही सरकार यहां भी देवस्थानम बोर्ड लेकर आई है।
इसमें किसी के हक-हुकूक का कोई नुकसान नहीं हो रहा है। वह संस्थाएं अपना काम सही से नहीं कर रही थी, इसीलिए बोर्ड लाया गया है। इस बीच नेता सदन भी सदन में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने शपथ ली है, तब से पंडा समाज व अन्य लोगों ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर उनके समक्ष चिंताएं जताई हैं। हमारा काम किसी भी मंदिर में व्यवस्था को ठीक करना। सड़क, बिजली, आवास, पानी आदि करना। हमारी सरकार करेगी।
इसके बाद भी जो आपत्ति आई है, उन सबको सुनने के लिए हमने मनोहरकांत ध्यानी की अध्यक्षता में हाईपावर समिति का गठन कर दिया है। जिसका जल्द ही शासनादेश हो जाएगा। इसमें छह अधिकारी और नेता भी शामिल होंगे। वह सबकी बात सुनेंगे। इसके बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उस हिसाब से देवस्थानम बोर्ड को लेकर बीच का रास्ता निकाला जाएगा। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। बाद में यह प्राइवेट बिल अस्वीकार कर दिया गया।