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उत्तराखंड विधानसभा सत्र: बहाल होंगे उपनल के निकाले गए कर्मचारी, दोबारा आउटसोर्सिंग से होंगे भर्ती

Tue, 25 Jun 2019 08:47 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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विभागों से बिना किसी ठोस कारण हटाए गए उपनल कर्मचारी बहाल होंगे। विधानसभा में विधायक सुरेश राठौर के अतारांकित प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री व सैनिक कल्याण मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे कर्मचारियों को दोबारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियोजित करने के लिए कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। 

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प्रदेश के कई विभागों में उपनल के जरिये कर्मचारियों को आउटसोर्स किया गया है। पिछले कुछ समय के दौरान कई विभागों ने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। हालांकि इनमें से ज्यादातर ने कुछ समय बाद कर्मियों को वापस ले लिया। इसको लेकर उपनल कर्मचारी कई बार विरोध भी जता चुके हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री के इस जवाब से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली होगी। सैनिक कल्याण मंत्री ने बताया कि केवल कदाचार के दोषियों को हटाने का प्रावधान है। उसके अलावा अगर किसी कर्मी को अकारण हटाया गया है तो उसे पद उपलब्ध होने और अर्हता पूरी करने पर दोबारा आउटसोर्स करने के निर्देश दिए गए हैं। 
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नहीं कर सकते उपनलकर्मियों का तबादला
विधायक प्रीतम सिंह पंवार के अतारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए सैनिक कल्याण मंत्री व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उपनल कर्मियों का तबादला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनके तबादले का कोई प्रावधान नहीं है। न ही राज्य सरकार के संज्ञान में ऐसा कोई प्रकरण आया है।

रिन्यूवल नहीं कर रहे विभाग
प्रदेश सरकार के विभिन्न विभाग उपनल से कर्मचारियों को हटा नहीं रहे हैं लेकिन महीनों तक उनका कांट्रेक्ट रिन्यूवल भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव हेमंत सिंह रावत ने बताया कि मार्च में विभागों में कार्यरत कर्मियों का रिन्यूवल होना था। लेकिन कई माह बीतने के बावजूद अब तक रिन्यूवल नहीं हुआ है।

10551 करोड़ के प्रोजेक्टों को केंद्र की हरी झंडी का इंतजार

प्रदेश सरकार ने केंद्र को करीब 10,551 करोड़ रुपये लागत के एक दर्जन से अधिक विकास योजनाओं के प्रस्ताव भेजे हैं। वाह्य सहायतित योजना के तहत भेजे गए इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान इंटरनेशनल कापरेशन एजेंसी (जायका) के तहत धनराशि मांगी गई है। केंद्र सरकार से अनुमोदन मिलने पर प्रदेश सरकार भविष्य में इन योजनाओं पर कार्य शुरू करेगी।

सरकार की ओर से विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी गई। यह प्रश्न निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने पूछा था। उनके प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया वर्ष 2016-17 में विभिन्न विभागों व सेक्टरों के तहत 10 परियोजनाएं संचालित की गई और एक दर्जन से अधिक परियोजनाएं केंद्र से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद संचालित होंगी। ये प्रोजेक्ट शहरी विकास, पेयजल, कृषि, सिंचाई, आपदा प्रबंधन विभाग, लोनिवि, तकनीकी शिक्षा विभाग से संबंधित हैं।

उत्तर में बताया गया है कि परियोजनाओं की कुल लागत का 20 प्रतिशत अंश राज्य द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि 80 प्रतिशत ऋण का 90 प्रतिशत अंश केंद्र सरकार वहन करेगी। इस प्रकार केंद्र सरकार से  परियोजनाओं के लिए 72 प्रतिशत धनराशि प्राप्त हो रही है। 
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भविष्य में संचालित होने वाली परियोजनाएं 

परियोजना                                                    धनराशि (करोड़ में)    एजेंसी
डेवलपमेंट ऑफ स्मार्ट अर्बन क्लस्टर  प्रोजेक्ट    776.43             जायका
उत्तराखंड डिस्ट्रिक रोड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट            1049.53         जायका
उत्तराखंड फारेस्ट रिसर्च लिंक्ड लाइवलीहुड प्रोजेक्ट 1215            जायका
सात वर्षीय हिल एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट    715                 वर्ल्ड बैंक
इंट्रीग्रेटेड हार्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट                700                वर्ल्ड बैंक
उत्तराखंड वर्ल्ड फोर्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट                9.25             वर्ल्ड बैंक
उत्तराखंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट                        2200            वर्ल्ड बैंक 
रूरल इंटरप्राइजेज एंड एक्सेलेरेटेड ट्रांसफार्मेशन प्रोजेक्ट 600    वर्ल्ड बैंक
उत्तराखंड रूरल ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट            1046.75    वर्ल्ड बैंक
उत्तराखंड अर्बन वाटर सप्लाई एवं सीवरेज प्रोजेक्ट    900                वर्ल्ड बैंक                    
उत्तराखंड रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट            1340            वर्ल्ड

नोट: सरकार ने टिहरी झील के विकास व रोपवे निर्माण के लिए भी एडीबी और जायका से ऋण लेने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजे हैं।
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