फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़िए, PM मोदी की प्रचंड लहर में कैसे ढह गया कांग्रेस का किला

Sun, 12 Mar 2017 06:34 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
pm modi - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पीएम मोदी के डबल इंजन की रेल उत्तराखंड में ऐसी दौड़ी कि कांग्रेस के तमाम दिग्गजों समेत उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत की रणनीति डीरेल हो गई। सीएम समेत तकरीबन सभी मंत्री हार गए और राज्य गठन के बाद सबसे बड़ी जीत का कीर्तिमान दर्ज करते हुए दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा मजबूत सरकार बनाने की स्थिति में आ गई।
विज्ञापन


चुनाव में आए जनादेश ने साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कथित तौर पर सत्ता की सौदेबाजी की खातिर आंखें मूंद ली थी, मगर वोट डालते समय मतदाताओं की आंखें खुली रहीं। सीएम के दामन पर लगे सबसे बड़े दाग’ के आगे उन्हें न दागी दिखे न बागी। इस चुनाव में भाजपा की जिताऊ प्रत्याशी की थ्योरी भी कामयाब रही, जबकि हरीश रावत के सारे दांव उलटे पड़े।

राज्य के अब तक के चुनावी इतिहास में यह कांग्रेस की सबसे बड़ी हार है। ये हार इस लिहाज से भी असहज करने वाली है कि पार्टी ने जिन हरीश रावत को चुनाव प्रचार का चेहरा बनाया, वह खुद चुनाव हार गए। हरिद्वार ग्रामीण में उन्हें स्वामी यतीश्वरानंद ने बड़े अंतर से हराया तो किच्छा में वे राजेश शुक्ला से बेहद करीबी अंतर से परास्त हुए।
विज्ञापन

एक मंत्री को छोड़कर बाकी सारे मंत्री चुनाव हार गए

हरीश रावत - फोटो : ANI
सरकार के एक मंत्री को छोड़कर बाकी सारे मंत्री चुनाव हार गए। हालांकि कांग्रेस ने बागी और दागी के मुद्दे को प्रमुख चुनावी हथियार बनाया, मगर राज्य के वोटर ने सीएम के दामन पर लगे उस दाग को याद रखा जो छुपे कैमरे ने उन्हें कथित तौर पर सत्ता की सौदेबाजी करते हुए कैद किया था।

मतदाताओं ने बागियों में पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा, डॉ. हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, कुंवर प्रणव चैंपियन, उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बत्रा समेत तकरीबन सभी को जिता दिया। लेकिन कद्दावर नेता हरीश रावत किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव हार गए। उनके दो जगह से चुनाव लड़ने से बाकी सीटों पर फायदा मिलने का फार्मूला भी बुरी तरह पिट गया। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भी मात मिली।

भीषण हार के बाद अब कांग्रेस के भीतर से जो सवाल बाहर आ रहे हैं, उनके निशाने पर सरकार और संगठन हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो टिकटों के आवंटन से लेकर चुनाव प्रचार तक सीएम और प्रदेश अध्यक्ष जिस तरह से नदी के दो किनारों पर खड़े होकर अपनी ढपली अपना राग अलापते रहे, उसने संगठन का बंटाधार कर दिया।
विज्ञापन

इलेक्शन कैंपेन गुरु प्रशांत किशोर को सौंपी प्रचार की कमान

प्रशांत किशोर की सलाह पर चलेगी कांग्रेस - फोटो : file photo
प्रचार की कमान इलेक्शन कैंपेन गुरु प्रशांत किशोर को सौंपकर सांगठनिक नेटवर्क के वजूद को नकार दिया गया। नतीजा यह रहा कि कांग्रेस का कार्यकर्ता पार्टी को जिताने के इरादे से बाहर निकला ही नहीं।

उधर, प्रचंड बहुमत की खुशी में चूर भाजपा के लिए भी जीत का जायका इस लिहाज से थोड़ा खराब रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट चुनाव हार गए। पूर्व कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल का भी यही हश्र हुआ। लेकिन पार्टी का जिताऊ प्रत्याशी की थ्योरी सटीक रही। अब दोनों ही दल अलग-अलग रास्तों पर हैं।

कांग्रेस में सबसे बड़ा सवाल लीडरशिप का है। हरीश रावत के बाद वहां पार्टी का अगला नेता कौन होगा? भाजपा में भी यह सवाल है कि वह नए चेहरे के साथ सरकार बनाएगी या अनुभवी चेहरे को कमान सौंपेगी? 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें