इस विधानसभा चुनाव में चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठी बसपा का सफाया हो गया है। पार्टी के प्रत्याशी एक भी सीट नहीं जीत पाए। उत्तराखंड गठन के बाद हुए विधानसभा के चुनावों में ऐसा पहली बार हुआ जब कि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली।
पिछले विधानसभा चुनाव में तीन सीट जीतने वाली बसपा को इस बार इससे अधिक की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम सामने आते ही सारे कयास धरे रह गए। पार्टी का मत प्रतिशत भी 12.19 फीसदी से गिरकर सात फीसदी पहुंच गया।
उत्तराखंड गठन के बाद तीन विधानसभा चुनावों में बसपा ने प्रदेश में राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई थी।
2002 के विधानसभा चुनावों में बसपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी, जो 2007 में बढ़कर आठ पर पहुंच गई। इसके बाद 2012 में बसपा को तीन सीटों पर ही जीत मिली, लेकिन उसके मत प्रतिशत में इजाफा हुआ। बसपा इस बार भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन मोदी मैजिक ने पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। प्रदेश के मैदानी जनपद (हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर) में अब तक बसपा अपनी उपस्थिति दर्ज कराती आई थी।
इस बार इन दोनों जनपदों की 20 विधानसभा सीटों में सिर्फ एक सीट पर बसपा का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर पहुंच पाया है। इसके अलावा सभी सीटों पर पार्टी प्रत्याशी तीसरे और उससे नीचे की पायदान पर रहे। 2012 में बसपा ने हरिद्वार जनपद की भगवानपुर, झबरेड़ा और मंगलौर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार इन तीनों सीटों पर भी पार्टी हार गई।
उधर, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भृगुराशन राव का कहना है कि समझ में नहीं आ रहा है ऐसा कैसे हो गया। उन्होंने भी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की तरह ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने की आशंका जताई। कहा कि यह समझ से परे है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी भाजपा ने बढ़त कैसे बना ली।
प्रदेश में अब बसपा का प्रदर्शन
वर्ष प्रत्याशी जीते मत प्रतिशत
2002 68 7 10.93 फीसदी
2007 69 8 11.76 फीसदी
2012 70 3 12.19 फीसदी
2017 69 0 7 फीसदी