उत्तराखंड में पहाड़ की महिलाएं आर्थिकी ही नहीं, लोकतंत्र की भी रीढ़ हैं। नौ पर्वतीय जिलों की कुल 34 विधानसभा क्षेत्रों में से 33 सीटों पर वोट देने में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं लेकिन आधी आबादी को राजनीति में 20 प्रतिशत भी प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है।
राज्य आंदोलन, सामाजिक सरोकार में महिलाओं को अग्रणी भूमिका रही है। साथ ही वे मतदान करने में भी महिलाएं पीछे नहीं हैं। चुनाव में वोट देने में पहाड़ की महिलाएं पुरुषों से आगे रही हैं। प्रत्याशियों की हार जीत का फैसला लेने में महिलाओं का बड़ी भूमिका रहती है लेकिन राजनीति में प्रतिनिधित्व देने पर आधी आबादी सियासी दलों के हाशिए पर रहती हैं।
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सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन ने प्रदेश के नौ पर्वतीय जिलों के चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है। उत्तराखंड में महिलाओं को राज्य की आर्थिकी की रीढ़ कहा जाता है, लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि राज्य में महिलाएं लोकतंत्र की रीढ़ का काम भी कर रही हैं। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के चुनाव आयोग के तमाम प्रयासों के बावजूद जहां राज्य में पुरुषों का मतदान प्रतिशत कम हैं लेकिन महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान कर रही हैं। फाउंडेशन का इस विश्लेषण का मुख्य उद्देश्य लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करना, पलायन और महिला सशक्तीकरण की ओर राजनीति दलों का ध्यान आकर्षित करना है।
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में नौ पर्वतीय जिलों की 34 सीटों पर पुरुषों का मतदान प्रतिशत 51.15 प्रतिशत और महिलाओं का मतदान 65.12 प्रतिशत रहा। राज्य के पर्वतीय जिलों की 34 में से 33 सीटों पर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। पर्वतीय जिलों में उत्तरकाशी जिले की एक मात्र पुरोला विधानसभा सीट पर महिलाओं के मुकाबले 583 ज्यादा पुरुषों ने मतदान किया। पर्वतीय जिलों के अलावा मैदानी जिलों की डोईवाला, ऋषिकेश, कालाढूंगी और खटीमा विधानसभा में भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया।
पर्वतीय जिलों की 34 सीटों पर औसतन हर विधानसभा सीट पर 28202 महिलाओं और 23086 पुरुषों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रत्येक सीट पर पुरुषों के मुकाबले औसतन 5116 ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले। महिला मतदान में बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और द्वाराहाट विधानसभा सबसे आगे रहे। बागेश्वर में पुरुषों के मुकाबले 9802, रुद्रप्रयाग में 9517 और द्वाराहाट में 9043 ज्यादा महिलाओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।
राज्य के पर्वतीय जिलों में मतदान में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के बावजूद प्रमुख राजनीतिक दलों ने बहुत कम संख्या में महिलाओं को टिकट दिया है। आने वाली सरकारों को राज्य में महिलाओं के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने की जरूरत है। इस बात का विशेष ध्यान में रखा जाना चाहिए कि पलायन और रोजी रोटी की मजबूरियों के चलते जो लोग वोट नहीं दे पाते, उन्हें किस तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सके।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन
राजनीति दलों ने चुनाव मैदान में उतारी महिला प्रत्याशी
दल संख्या
भाजपा 08
कांग्रेस 05
आप 07