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बजट सत्र: विधानसभा की कमेटी करेगी जहरीली शराब कांड की जांच, स्पीकर ने दिए निर्देश

Wed, 13 Feb 2019 08:41 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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विधानसभा सत्र
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सदन के दूसरे दिन भी आक्रामक रहे कांग्रेस विधायकों की मांग स्वीकारते हुए स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने जहरीली शराब से मौतों के मामले में मंगलवार को विधानसभा सदस्यों की एक कमेटी गठित करने के निर्देश दे दिए। यह कमेटी मौके पर जाकर जहरीली शराब कांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं के तथ्यों का अन्वेषण करेगी। भारी हंगामे के बीच स्पीकर ने यह निर्देश दिए भी दिए कि समिति शराब जैसी सामाजिक बुराई को रोकने के लिए बहुआयामी योजना बनाकर दे।

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इसके अलावा, तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय क्या हो सकते हैं, उसके बारे में स्थिति स्पष्ट करे। पीठ ने जहरीली शराब से मौत जैसे मामलों में अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम विकसित करने के लिए भी कहा। उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी पूर्व निर्धारित तरीके से अपना काम करेगी। 

 राज्यपाल के चार मिनट पहले अभिभाषण पढ़ने को लेकर सदन के पहले दिन हंगामा करने वाले कांग्रेसी विधायक मंगलवार को और आक्रामक नजर आए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधायक प्रीतम सिंह ने जहरीली शराब के मामले पर नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग की। विपक्षी विधायकों के दबाव के बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल रोककर नियम 310 की ग्राहृयता (विषय नियम 310 के तहत उठाने लायक है या नहीं) पर चर्चा के निर्देश दिए।
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नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, ममता राकेश, करण माहरा, गोविंद सिंह कुंजवाल, हरीश धामी, मनोज रावत, फुरकान अहमद, आदेश चौहान, राजकुमार ने वक्तव्य में सरकार को निशाने पर लिया। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने घटना के बाद से की गई तमाम कार्रवाइयों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। सरकार के जवाब से विपक्ष ने असहमति जताई और विधायक नारेबाजी करते हुए वेल पर आ गए।

सदन में नारे लिखी तख्तियां लहराई। थोड़ी देर बाद वे अपने स्थान पर आकर बैठ गए। ग्राह्यता पर चर्चा के बाद स्पीकर प्रेम चंद्र अग्रवाल ने अपना विनिश्चय (निर्णय) दिया कि जहरीली शराब मामले के तथ्यों के अन्वेषण के लिए विधायकों की एक कमेटी गठित की जाएगी।  

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जो मौके पर जाकर वस्तु स्थिति का पता लगाकर रिपोर्ट देगी। बावजूद इसके असंतुष्ट विपक्ष एक बार फिर वेल पर आ गया। जोरदार नारेबाजी हुई और बाद में कांग्रेस के सभी विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।

वह बाहर विधान मंडल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस के विधायक भोजनावकाश के बाद की कार्यवाही में भी शामिल नहीं हुए। विपक्ष की गैरमौजूदगी में ही सरकार ने सदन के पटल पर दो विधेयक रखे। इसके अलावा, राज्यपाल के बजट अभिभाषण पर भी चर्चा हुई।

जहरीली शराब से मौतें हृदयविदारक हैं। दुखद हैं, मैं श्रद्धांजलि देता हूं। ऐसे मामलों में जन जागरुकता के व्यापक अभियान की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो घटनास्थल पर जाएगी। कारण, निदान, जागरुकता कैसे हो, जैसी तमाम बातों पर विधानसभा में अपनी रिपोर्ट यह कमेटी देगी।
-प्रेम चंद्र अग्रवाल, स्पीकर।

सरकार इस मामले में संवेदनशील होकर कार्य कर रही है। एसआईटी को विपक्ष हल्के में ले रहा है, जबकि इसके ठोस परिणाम सामने आएंगे। हम इस बुराई को ‘रूट आउट’ करने पर काम कर रहे हैं। ऐसे मामलों के लिए इसी सत्र में कठोर कानूनी प्रावधान करने का मैं सदन से वादा करता हूं।
-प्रकाश पंत, आबकारी मंत्री।

सात फरवरी की घटना पर सरकार 11 फरवरी को एसआईटी की बात करती है, इस मामले में उसकी गंभीरता के और क्या प्रमाण हो सकते हैं? एहतियातन कुछ नहीं किया गया और अब ताबड़तोड़ कार्रवाई की बात कही जा रही है। सीएम और आबकारी मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
 -प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
 
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