इसके साथ ही हरिद्वार जिले के आबकारी विभाग की निष्क्रियता को भी सवालों के घेरे में लिया गया है। समिति ने यह भी कहा कि जिस केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, उस पर स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाले ड्रग विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस महकमे खास कर कच्ची शराब के लिए कुख्यात क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। यह रिपोर्ट अब सरकार को के हवाले कर दी गई है।
शराब कारोबार पर अध्ययन को बना आयोग
सरकार ने राज्यभर में शराब कारोबार में आ रहीं तमाम दिक्कतों के अध्ययन और उनके निस्तारण के लिए सुझाव देने को एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इस आयोग का अध्यक्ष राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपल्च्याल को बनाया गया है। इस आयोग को छह माह में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने इस आयोग के गठन की पुष्टि की। विभागीय मंत्री पंत ने बताया कि आयोग के दायरे में कच्ची और अवैध शराब के साथ ही पूरा शराब कारोबार होगा। आयोग देखेगा कि किन-किन स्तरों पर क्या-क्या समस्याएं आ रहीं हैं और उनका निस्तारण या उन पर नियंत्रण किस तरह से हो सकता है।
विस के पटल पर पेश विस की समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार जल्द ही एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) विस में पेश करेगी।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्य मंत्री (सदन में बोले)