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उत्तराखंड बजट सत्र: गन्ने पर कड़वाहट, सदन में संसदीय मर्यादाएं तार-तार

Thu, 14 Feb 2019 10:08 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत धरने पर बैठे - फोटो : अमर उजाला
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 गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के बाबत, नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेसी विधायकों ने बुधवार को सदन में जमकर हंगामा किया। हाथों में गन्ना लेकर सदन में पहुंचे कांग्रेसी विधायकों ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। स्पीकर पीठ की ओर बढ़े उग्र कांग्रेसी विधायकों को मार्शल ने रोकने की कोशिश की तो वे उनसे उलझ गए और धक्कामुक्की तक कर डाली। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी। पूरा प्रश्नकाल इस हंगामे की भेंट चढ़ गया। बाद में विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में हुई सदन की कार्यवाही में दो विधेयक पास हुए और राज्यपाल के बजट अभिभाषण पर चर्चा हुई।

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बुधवार सुबह सदन के तीसरे दिन की कार्यवाही आरंभ हुई तो नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल से गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर नियम 310 में चर्चा कराने की मांग की। उनकी मांग के समर्थन में विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्य वेल में आकर प्रदर्शन करने लगे तो स्पीकर ने नियम 58 में विषय सुनने की अनुमति दे दी। लेकिन, विपक्ष इस पर राजी नहीं हुआ और उसका विरोध जारी रहा। हाथों में गन्ना उठाए ये विधायक विरोध करने लगे। जब विरोध नहीं थमा तो स्पीकर ने 11. 15 बजे पर, फिर 11. 45 बजे और उसके बाद 11. 55 बजे तक पर सदन की कार्यवाही स्थगित की।

12 बजकर 10 मिनट पर सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, लेकिन चार मिनट ही चली। इस दौरान जब स्पीकर ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया तो कांग्रेस विधायक करन माहरा, फुरकान अहमद, हरीश धामी, राजकुमार नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष की पीठ की ओर बढ़े। वहां मौजूद मार्शल ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान विपक्षी विधायकों और उनके बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। स्पीकर ने सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल तक स्थगित कर दी। 12.30 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, लेकिन विपक्ष इसमें शामिल नहीं हुआ। उसकी गैरमौजूदगी में सरकार ने सदन की कार्यवाही की। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग(संशोधन) विधेयक व हिमालयीय विवि विधेयक पारित हुआ। भोजनावकाश के बाद तीन बजे राज्यपाल के बजट अभिभाषण पर चर्चा हुई, जिसे जारी रखा गया।

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पहली बार सदन में गन्ना लेकर आए विधायक

उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब गन्ना किसानों की मांग पर विपक्षी विधायक गन्ना लेकर ही सदन में पहुंच गए। भाजपा विधायक उनके इस आचरण को लेकर स्तब्ध थे और उन्होंने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ माना।  

निजी चीनी मिलों पर 196 करोड़ बकाया
गन्ना विकास मंत्री प्रकाश पंत के मुताबिक, प्रदेश की तीन निजी चीनी मिलों पर गन्ना किसानों को 196 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। सहकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों का पेराई सत्र 2017-18 का 440,41 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इन मिलों पर कोई गन्ना मूल्य बकाया नहीं है।

गन्ना किसानों के लिए बकाया भुगतान सबसे बड़ा मुद्दा है। उन्हें सरकारी चीनी मिलें भुगतान नहीं कर रही हैं। उनका कई हजार करोड़ का बकाया हो गया है। मजबूरी में गन्ना किसानों ने गन्ना बुआई कम कर रहे हैं। इसके बाद भी सरकार इसे प्राथमिकता नहीं दे रही है। हमने नियम 310 में चर्चा की मांग की। हमने नियम 58 में पहले सुनने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने नहीं सुना।
-डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष

राज्यपाल के पहले अभिभाषण में गन्ना किसानों को 15 दिन के अंदर भुगतान करने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार अपने वादे से मुकर गई। सरकार के संरक्षण में निजी चीनी मिलों की मनमानी हो रही है। किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। 
-हरीश धामी, विधायक कांग्रेस

किसी भी मसले का समाधान चर्चा से ही निकलेगा। लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। आज गन्ना किसानों के मसले पर ही दो अल्प सूचित प्रश्न लगे थे। विपक्ष को गन्ना किसानों की परवाह होती तो वह प्रश्नकाल चलने देता। अल्पसूचित प्रश्नों के दौरान अपनी बात कहता। आज सदन में जो हुआ वह सदन की गरिमा और परंपरा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। उनका आचरण नियमावली के विपरीत और अमर्यादित रहा।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्यमंत्री  

गन्ना किसानों के लिए सड़क पर हरीश रावत का उपवास

गन्ना किसानों की आवाज को बुलंद करने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर बैठकर उपवास किया। गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान के लिए पूर्व घोषित इस कार्यक्रम में रावत ने मौके की नजाकत को समझते हुए जहरीली शराब के मुद्दे को भी शामिल कर लिया। रावत के इस कार्यक्रम को पूरी कांग्रेस का साथ मिला। इस मौके पर भाजपा की राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया। आरोप लगाया गया कि न तो वह गन्ना किसानों के प्रति संवेदनशील है और न ही जहरीली शराब पीकर मरने वाले लोगों के परिवारों के प्रति।

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, हरीश रावत आज सुबह हरिद्वार रोड स्थित एक होटल के सामने कार्यकर्ताओं के साथ कार से पहुंचे। इसके बाद सभी ने विधानसभा की ओर पैदल चलना शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया, तो वे वहीं सड़क पर धरना देकर बैठ गए और उनका उपवास शुरू हो गया। इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि गन्ना गंगा यात्रा के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि बकाये का भुगतान न होने पर वह विधानसभा के सामने उपवास करेंगे। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में भी निजी और सरकारी चीनी मिलों का 300 करोड़ का बकाया बाकी है। सरकार ने इससे पहले किश्तों में भुगतान किया है। गन्ना किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा है। उन्होंने तुरंत भुगतान की मांग की। उन्होंने जहरीली शराब के मामले में सरकार को असंवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि मृतक आश्रितों को पांच लाख का मुआवजा मिलना चाहिए। इस लापरवाही के लिए जो सरकारी मुलाजिम और राजनीतिक लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मृतक के परिजनों को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश समेत कांग्रेस के लगभग सभी विधायक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर इस कार्यक्रम में शरीक हुए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बताया कि सदन में गन्ना किसानों की मांग को पूरी दमदारी से उठाया गया है। हरीश रावत के उपवास कार्यक्रम में कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक समेत पार्टी के महानगर, जिला और प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहे। हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी और अन्य कई जिलों से कांग्रेस के कार्यकर्ता उपवास कार्यक्रम में शामिल हुए।

हाथ में गन्ना और चौकीदार चोर है...का नारा
गन्ना किसानों की बात करते हुए कांग्रेस के कई कार्यकर्ता हाथ में गन्ना लिए उपवास में दिखाई दिए। संचालन का जिम्मा हरीश रावत ने खुद ही संभाला। उन्होंने नारे भी लगवाए। उन्होंने बीच-बीच में चुटकी भी ली। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सिर्फ इतना बोलेंगे कि चौकीदार कैसा है, इसके जवाब में आप वो ही बोलिए, जो गली गली में बोला जा रहा है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को लेकर भी चुटकी ली और कहा कि वे चाहे, तो मन के भीतर भीतर कैसे सकते हैं कि चौकीदार कैसा है।
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विपक्ष के खिलाफ धरने पर बैठे तीन भाजपा विधायक

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर कांग्रेस के सदन में हंगामे के जवाब में भाजपा के तीन विधायकों ने विपक्ष के खिलाफ धरना दे दिया। भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, संजय गुप्ता और देशराज कर्णवाल नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। तीनों विधायकों ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। प्रश्नकाल में गन्ना किसानों को लेकर उनके सवाल थे, जिन पर सरकार को जवाब देना था। तीनों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इशारे पर कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। उन्होंने इसे विपक्ष की नौटंकी करार दिया। विधानसभा उपाध्यक्ष और सचिव के अनुरोध पर भाजपा विधायक  धरने से उठे।

भाजपा विधायक का लोनिवि मुख्य अभियंता कार्यालय में धरना 
द्वाराहाट से भाजपा विधायक महेश नेगी बुधवार को लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि मुख्य अभियंता उनके क्षेत्र में होने वाले सड़कों और पुलों के कार्य को नहीं होने दे रहे हैं। जबकि इसके लिए मुख्यमंत्री प्रस्ताव पर स्वीकृति दे चुके हैं। वहीं, दोपहर बाद मुख्यमंत्री के ओएसडी व पार्टी विधायकों ने मुख्य अभियंता से वार्ता की, जिसके बाद कार्रवाई के आश्वासन पर उन्होंने धरना खत्म कर दिया। द्वाराहाट विधायक सुबह यमुना कॉलोनी स्थित लोक निर्माण विभाग कार्यालय पहुंचे। जहां वह मुख्य अभियंता आरसी पुरोहित से मिले। उन्होंने पूछा कि तीन बार मुख्यमंत्री से स्वीकृति के बाद भी आगणन शासन को क्यों नहीं भेजा गया? जबकि दो बार अपर मुख्य सचिव तथा एक बार उन्हें भी मुख्यमंत्री की ओर से आदेशित किया गया था। जिसमें मुख्यमंत्री ने सात दिन के भीतर आगणन शासन को भेजने के आदेश दिए थे।

मुख्यमंत्री की ओर से मेल के जरिये यह आदेश भेजा गया था। विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य अभियंता की ओर से अपनी रिपोर्ट शासन के बजाय विभागाध्यक्ष को भेज दी गई। मुख्यमंत्री की ओर से सड़कों और पुलों के लिए आगणन मांगने के बाद भी अधिकारी उस पर आपत्ति लगा रहे हैं, जो गलत है। इसके बाद वह कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए। बाद में सल्ट विधायक सुरेंद्र सिंह जीना, पूरन फर्त्याल, बागेश्वर विधायक चंदन रामदास तथा मुख्यमंत्री के ओएसडी धीरेंद्र पंवार ने मुख्य अभियंता से बात की। मुख्य अभियंता ने बृहस्पतिवार को आगणन शासन को भेजने का आश्वासन दिया, जिसके बाद द्वाराहाट विधायक ने धरना खत्म कर दिया।  

यह है मामला 
अल्मोड़ा के भुजान रिची विल्लेख मोटर मार्ग पर कुजगढ़ नदी पर निर्माणाधीन 80 मीटर लोहे के पुल में आरसीसी डैक स्लैब के स्थान पर स्टील डेकिंग प्लेट के लिए केंद्र सरकार से 16 करोड़ 58 लाख रुपये की धनराशि जारी की थी। जिसमें से 13 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ। जिससे पुल का निर्माण शुरू हो गया। ऐसे में एक करोड़ से अधिक की धनराशि शेष बच रही थी। क्षेत्र के लोगों ने शेष धनराशि से आरसीसी डैक स्लैब के स्थान पर स्टील डेकिंग प्लेट डालने का अनुरोध किया, जिसे लेकर मुख्यमंत्री से बात की गई थी, ताकि लैप्स होने के बजाय शेष धनराशि से पुल के साथ ही खस्ताहाल सड़कें बन सकें।
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