प्रदेश सरकार के विभागों में पदोन्नतियों पर रोक हटाने और रोक बरकरार रखने को लेकर घमासान तेज हो गया है। दोनों संगठन प्रमोशन को लेकर तीखे तेवर दिखा रहे हैं।
एक तरफ उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन तत्काल रोक हटाने की मांग कर रही है तो दूसरी ओर उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन तब तक कोई डीपीसी न करने की मांग कर रही है जब तक न्यायालय से अंतिम फैसला नहीं हो जाता है।
विभागों में पदोन्नति पर से तत्काल रोक हटाए सरकार : एसोसिएशन
उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन ने सभी विभागों में पदोन्नतियों पर लगाई गई रोक को तत्काल हटाने की मांग की है। इस मांग को लेकर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को प्रदेश सचिवालय में अपर मुख्य सचिव (कार्मिक एवं सतर्कता) राधा रतूड़ी से मिला और उनसे अनुरोध किया कि वे पदोन्नतियों में लगी रोक हटाने के निर्देश जारी करें।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी और प्रदेश महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसांई के नेतृत्व में अपर मुख्य सचिव से मिले प्रतिनिधिमंडल ने उच्च न्यायालय के 15 नवंबर को आए न्यायिक आदेश की प्रति भी सौंपी। मांग के समर्थन में उन्होंने कहा कि एक अप्रैल 2019 को ज्ञानचंद बनाम राज्य व अन्य में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने सभी विभागों में विभागीय पदोन्नतियों पर रोक लगा दी थी। लेकिन एक अप्रैल को पारित उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई।
इस याचिका पर 15 नवंबर को उच्च न्यायालय ने पूर्व के निर्णय को संशोधित किया है। इससे अब कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को 11 सितंबर को पदोन्नतियों में लगाई गई रोक का कोई औचित्य नहीं रह गया है। प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव से उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पदोन्नतियों पर लगी रोक तत्काल हटाने और एक नियत अवधि के अंदर आरक्षण के बगैर विभागीय पदोन्नतियां किए जाने के आदेश करने का अनुरोध किया।
जोशी के मुताबिक, अपर मुख्य सचिव ने एसोसिएशन की बातों को बहुत गंभीरता से सुना। जोशी ने उम्मीद व्यक्त की कि सरकार पदोन्नतियों पर लगी रोक हटाकर नए सिरे से पदोन्नतियां किए जाने का आदेश जल्द जारी करेगी। प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय सचिव विनोद नौटियाल, एसोसिएशन के सीएल असवाल, वीके धस्माना, मुकेश बहुगुणा, हीरा सिंह बसेड़ा, शांतनु शर्मा, मुकेश रतूड़ी, शिव राज, रीता कौल, डॉ. गार्गी मिश्रा, केके उनियाल, मुकेश रतूड़ी, डीएस सरियाल, राजेंद्र सिंह चौहान, नरेंद्र भट्ट समेत कई अन्य कर्मचारी नेता शामिल थे।