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उत्तराखंडः मौसम का मिजाज बदला तो दो महीने बाद जंगलों को मिली आग से राहत

Tue, 04 Jun 2019 02:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
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दो-तीन दिन से उत्तराखंड के मौसम में आए बदलाव से दो महीने बाद कुमाऊं के जंगलों को आग से राहत मिली। गढ़वाल मंडल के जंगलों में भी फिलहाल आग शांत है। रविवार की शाम से लेकर सोमवार तक जंगलों में आग की कोई घटना सामने नहीं आई। कुमाऊं में अब तक दावानल की 1101 घटनाएं सामने आई हैं। कुमाऊं में 14 वन प्रभाग हैं। यहां 750948.652 हेक्टेयर में जंगल फैला है। फरवरी से फायर सीजन शुरू होने के बाद कुमाऊं में पहली आग की घटना 30 मार्च को सामने आई थी।

 

इसके बाद मई के पहले सप्ताह तक आग की छिटपुट घटनाएं सामने आईं। पांच मई के बाद आग की घटनाओं में तेजी आई। अब तक कुमाऊं के जंगलों में दावानल की 1101 घटनाएं सामने आईं। इसमें कुल 1721.65 हेक्टेयर जंगलों को नुकसान पहुंचा है। जंगल जलने से 34,44,496 रुपये का नुकसान हुआ है। करीब दो माह तक कुमाऊं के जंगलों को वनाग्नि से राहत मिली है। रविवार की दोपहर के बाद आग का कोई मामला सामने नहीं आया।

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48 घंटे के दौरान ओलावृष्टि और तेज बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 48 घंटे के दौरान ओलावृष्टि और तेज बारिश की चेतावनी जारी की है। राजधानी में भी अगले 48 घंटे तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। सोमवार को प्रदेशभर में आंशिक बादल छाए रहे। राजधानी में भी हल्की धूप के बीच बादलों का डेरा रहा। दिन के तापमान में 1.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। रविवार को अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री था, वहीं सोमवार को तापमान गिरकर 36.8 डिग्री पर पहुंच गया।
 
मौसम विभाग ने अब प्रदेशभर में अनेक हिस्सों में अगले 48 घंटे ओलावृष्टि, तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि मंगलवार से अगले 48 घंटे तक प्रदेशभर में बादल छाए रहेंगे। अनेक स्थानों पर बारिश का भी अनुमान है। बारिश की वजह से तापमान में दो से तीन डिग्री की और गिरावट का सकती है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

बारिश से बुझी जंगल की आग

गोपेश्वर में भी बारिश से अब जंगलों की आग भी बुझ गई है। इससे वन विभाग को भी राहत मिल गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब पूरे क्षेत्र में जंगलों की आग शांत हो गई है। चमोली जिले में करीब एक पखवाड़े से जंगल धू-धू कर जल रहे थे। वन विभाग लाख कोशिशों के बाद भी वनों की आग नियंत्रण नहीं कर पा रहा था।
 
आग बुझाने के लिए वन विभाग ने एसडीआरएफ का सहयोग भी लिया था। रविवार शाम को हुई बारिश से जंगलों की आग भी बुझ गई है। हालांकि कुछ इलाकों में वन विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया था। वन विभाग के जिला नोडल अधिकारी अमित कंवर ने बताया कि जिले में आग से 96.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है। फायर सीजन समाप्त होने के बाद निरीक्षण कर वास्तविक क्षति स्पष्ट हो पाएगी। 

अधिकांश क्षेत्रों में झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई

मौसम का एकाएक मिजाज बदलने से सोमवार को टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले के अधिकांश क्षेत्रों में झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई। वहीं बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिलने के साथ ही टिहरी, रुद्रप्रयाग और चमोली के जंगलों में भड़की आग बुझ गई है। रुद्रप्रयाग में ओलावृष्टि से दो युवक चोटिल हुए और एक कुत्ते की मौत हो गई। सोमवार को टिहरी के धनोल्टी में बारिश के साथ ही जमकर ओलावृष्टि हुई, जिससे सेब, नाशपाती, आडू, पुलम के फलदार पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। भिलंगना ब्लॉक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों और थत्यूड़ में भी झमाझम बारिश होने से लोगों ने गर्मी से राहत महसूस किया। जंगलों में लगी आग बुझने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
 
उधर, रुद्रप्रयाग में सोमवार अपराह्न 3 बजे के बाद बादलों की गर्जना के साथ जमकर ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश हुई। ओलावृष्टि से नकदी फसलों को भारी नुकसान हुआ। बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं जंगलों की आग बुझ गई है। वहीं, ओलावृष्टि से धनपुर पट्टी के घडियाल्का गांव में दो युवक चोटिल हो गए। वहीं, चमोली जिले में करीब एक पखवाड़े से जंगल जल रहे थे। रविवार शाम को हुई बारिश से जंगलों की आग बुझ गई है। हालांकि कुछ इलाकों में वन विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया था। वन विभाग के जिला नोडल अधिकारी अमित कंवर ने बताया कि जिले में आग से 96.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है। फायर सीजन समाप्त होने के बाद निरीक्षण कर वास्तविक क्षति स्पष्ट हो पाएगी। 
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लीसा श्रमिक की मौत

कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर वन प्रभाग के बैजनाथ रेंज में लीसा कूप को वनाग्नि से बचाते समय जान गंवाने वाले लीसा श्रमिक नेपाल निवासी रियूटिया के परिजनों को चार लाख की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बताया कि पीड़ित परिजनों को फिलहाल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल दे दी गई है। इसके बाद परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर विचार किया जा रहा है। प्रमुख वन संरक्षक के अनुसार वनाग्नि की घटनाओं में अब तक 11 वनकर्मी भी झुलस चुके हैं। इस सभी वनकर्मियों की हालत फिलहाल ठीक है।

‘क्लाउड सीडिंग’ से रोकी जाएगी जंगलों की आग 
साल दर साल बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने को लेकर वन विभाग परंपरागत विभागीय तरीकों के साथ ही विदेशों की तर्ज पर ‘क्लाउड सीडिंग’ (कृत्रिम बारिश) के जरिए आग पर काबू पाने की योजना पर काम कर रहा है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बताया कि इस संबंध में सऊदी अरब के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। सऊदी के अलावा कई अन्य देशों ने भी ‘क्लाउड सीडिंग’ के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। योजना को धरातल पर उतारने के लिए सऊदी अरब समेत क्लाउड सीडिंग तकनीकि अपनाने वाले देशों के विशेषज्ञों से मदद ली जाएगी। 
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