डॉ.धकाते ने बताया कि धार्मिंक अतिक्रमण को चिन्हित करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी की भी मदद ली जा रही है। इसमें जंगल के बीच या आसपास जहां कोई निर्माण दिख रहा है, उसका मौके पर कर्मचारियों को भेजकर भौतिक सत्यापन भी कराया जा रहा है। पिछले दो दिनों में उन्होंने वन प्रभाग हल्द्वानी, रामनगर, तराई पूर्व, तराई पश्चिमी और तराई केंद्रीय वनों प्रभागों की समीक्षा की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में चिन्हिकरण की इस कार्रवाई में हफ्ते से लेकर 10 दिन तक का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि इसके बाद ही सही तस्वीर सामने आ पाएगी। उन्होंने बताया कि चिह्नीकरण की कार्रवाई पूरी होते ही अवैध अतिक्रमणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई तेजी की जाएगी।