पहाड़ में नालों, धारों आदि पर अधिकतर गांवों की निर्भरता बनी हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि करीब 12 हजार प्राकृतिक स्रोत या तो सूख चुके हैं या फिर सूखने की कगार पर हैं। इस वजह से भी महिलाओं की परेशानी में इजाफा हो रहा है।
8800 गांवों में पानी की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 16 हजार राजस्व गांवों में से 8800 गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, टिहरी, चमोली में यह परेशानी अधिक है।यह तब है जबकि प्रदेश में करीब आठ बड़ी नदियां हैं।
पहाड़ में 5.32 लाख घरों में पहुंचाना है पानी
जल जीवन मिशन के तहत इस समय प्रदेश सरकार को करीब नौ लाख परिवारों को घरों में पानी उपलब्ध कराना है। यह आंकड़ा पूरे प्रदेश का है। इनमें से 3.79 लाख परिवार देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के हैं। बाकी पहाड़ के 5.32 लाख परिवारों को अभी घरों में पानी नसीब नहीं है। हर घर नल योजना के तहत अब केंद्र सरकार की मदद से इनके घरों तक पाइपलाइन पहुंचाकर पानी दिया जाना है।